Indian Patent Office ने फार्मा और बायोटेक पेटेंट के लिए नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। **19 सितंबर 2026** तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं। यह बदलाव पेटेंट आवेदन की जांच को और अधिक कड़ा बना सकता है, जिससे कंपनियों के ड्रग पाइपलाइन और रिसर्च आउटकम पर असर पड़ सकता है।
नियम क्यों बदले गए?
Indian Patent Office ने 4 सितंबर 2026 को फार्मा और बायोटेक आवेदनों के लिए नई गाइडलाइंस का ड्राफ्ट पेश किया है। यह 2013 और 2014 के पुराने नियमों की जगह लेगा। हालांकि, यह 'Patents Act' को नहीं बदलता, लेकिन पिछले 10 सालों में आए अदालती फैसलों को प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ जोड़ता है, जिससे एग्जामिनर्स के लिए पेटेंट जांच का एक नया स्टैंडर्ड सेट होगा।
कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
मुख्य बदलाव 'Section 3(d)' को लेकर है, जिसे 'anti-evergreening' क्लॉज भी कहा जाता है। इसका मकसद यह है कि कंपनियां मामूली बदलाव करके दवाओं के पेटेंट की अवधि न बढ़ा सकें।
- पॉजिटिव: इससे नियमों में स्पष्टता आएगी और कंपनियों को पता होगा कि पेटेंट अप्रूवल के लिए क्या क्राइटेरिया जरूरी हैं।
- नेगेटिव: जांच कड़ी होने से कम डेटा वाले या छोटे बदलाव वाले आवेदनों के रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ गई है। इससे रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में भारी खर्च करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने 19 सितंबर 2026 की डेडलाइन को काफी छोटा बताया है, क्योंकि इतने कम समय में तकनीकी चुनौतियों को समझना मुश्किल है। निवेशकों को आने वाली अर्निंग्स कॉल (Earnings Calls) पर नजर रखनी चाहिए, जहां कंपनियां यह बता सकती हैं कि वे अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी स्ट्रेटजी को इन कड़े नियमों के साथ कैसे ढालेंगी। पेटेंट सुरक्षा कंपनियों की भविष्य की कमाई के लिए सबसे अहम कड़ी है।
