सुप्रीम कोर्ट द्वारा दवाओं की कीमतों पर उठाए गए सख्त सवालों के बाद प्राइवेट हॉस्पिटल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई। निवेशक अब फार्मेसी मार्जिन और बिजनेस मॉडल पर संभावित सरकारी पाबंदियों को लेकर चिंतित हैं।
बाजार में मची हलचल
भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में उस समय हड़कंप मच गया जब सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट हॉस्पिटल्स द्वारा दवाओं और मेडिकल सामानों पर की जा रही भारी मुनाफाखोरी (Mark-up) पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने एक उदाहरण का जिक्र किया जहां ₹2,700 की कैंसर दवा को मरीजों को ₹27,000 में बेचा जा रहा था।
शेयरों में आई बड़ी गिरावट
इस न्यायिक टिप्पणी का असर सीधे बाजार पर दिखा। 30 सितंबर को BSE हेल्थकेयर हॉस्पिटल्स इंडेक्स में 5% की गिरावट दर्ज की गई। दिग्गजों की बात करें तो Apollo Hospitals में 5.7%, Fortis Healthcare में 6.3% और Max Healthcare के शेयरों में 5.3% की गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों को क्या है डर?
बाजार को अब इस बात का डर है कि कहीं सरकार फार्मेसी मार्जिन पर 16% जैसी कोई कैप न लगा दे। साथ ही, हॉस्पिटल्स द्वारा मरीजों को 'इन-हाउस' फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए मजबूर करने वाली प्रैक्टिस पर भी रोक लग सकती है। यह बिजनेस मॉडल इन कंपनियों के मुनाफे का एक बड़ा जरिया रहा है।
वैल्युएशन और भविष्य का रिस्क
सेक्टर अभी EV/EBITDA रेश्यो के लिहाज से 20 के मिड-टू-हाई रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो काफी महंगा माना जाता है। ऐसे में मार्जिन पर कोई भी चोट सीधे शेयरों की ग्रोथ पर असर डालेगी। हालांकि, फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं आया है और मामला 12 अक्टूबर, 2026 की अगली सुनवाई के लिए लिस्टेड है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
