साल 2026 के फाइनेंशियल ईयर (FY26) में भारत के बड़े हॉस्पिटल चेन्स ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। कंपनीज़ ने डबल-डिजिट रेवेन्यू (Revenue) और EBITDA ग्रोथ दर्ज की है, जिसका मुख्य कारण ज़्यादा पेशेंट वॉल्यूम और जटिल मेडिकल ट्रीटमेंट्स रहे। वहीं, हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में अच्छी तेजी दिख रही है, लेकिन मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को कच्चे माल की बढ़ती लागत और इंटरनेशनल टैरिफ प्रेशर से जूझना पड़ रहा है।
Detailed Coverage
हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में बंपर ग्रोथ
साल 2026 के फाइनेंशियल ईयर (FY26) में भारत के हेल्थकेयर सेक्टर ने शानदार परफॉर्मेंस दिखाई है। बड़े हॉस्पिटल नेटवर्क्स और ऑर्गनाइज्ड डायग्नोस्टिक्स प्रोवाइडर्स की अगुवाई में, मेजर हॉस्पिटल चेन्स ने पिछले साल की तुलना में 15% से ज़्यादा रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में बढ़ोतरी दर्ज की है। इस फाइनेंशियल ग्रोथ को हॉस्पिटल ऑक्युपेंसी रेट्स (जो पूरे साल 60% से 75% के बीच रहे) और प्रति ऑक्युपाइड बेड औसत आय में हुई बढ़ोतरी का सहारा मिला।
स्पेशियलिटी केयर और डायग्नोस्टिक्स का कमाल
हॉस्पिटल सेगमेंट में हुई ग्रोथ में हाई-एक्यूटी मेडिकल स्पेशियलिटीज़ का बड़ा योगदान रहा। कार्डियोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे डिपार्टमेंट्स में 15% से ज़्यादा की ग्रोथ देखी गई, जो कुल हॉस्पिटल रेवेन्यू में अहम हिस्सा बन गए हैं। इसी के साथ, ऑर्गनाइज्ड डायग्नोस्टिक्स सेगमेंट ने भी अपनी मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन बनाए रखी। प्रोवाइडर्स ने 15% से ज़्यादा रेवेन्यू ग्रोथ और 25% से ऊपर ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन दर्ज किया। इस सेक्टर को लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर, लैब नेटवर्क्स के विस्तार और देशभर में सैंपल कलेक्शन पॉइंट्स बढ़ाने से मदद मिली है।
इन्वेस्टमेंट का रुझान और बाज़ार का आउटलुक
FY26 के दौरान हेल्थकेयर स्पेस में इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी बनी रही। हालांकि, आखिरी तिमाही में ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम्स में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन प्राइवेट इक्विटी (PE) एक्टिविटी मज़बूत बनी रही। इस लगातार दिलचस्पी की वजह से सेक्टर में वैल्यूएशन्स (Valuations) बढ़ी हैं। FY27 को देखते हुए, हॉस्पिटल स्पेस में स्ट्रैटेजिक एक्विजिशन (Acquisitions) के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में और इन्वेस्टमेंट पर डील एक्टिविटी फोकस रहने की उम्मीद है।
मेडिकल डिवाइस सेगमेंट की चुनौतियाँ
जहां हॉस्पिटल्स और डायग्नोस्टिक्स ने तरक्की की है, वहीं हेल्थकेयर इकोसिस्टम के दूसरे हिस्से कुछ दबावों का सामना कर रहे हैं। मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों ने बताया है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर नए टैरिफ ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन फैक्टर्स ने डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग में लगी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाला है, जो हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक बिजनेस से अलग है। इन्वेस्टर्स को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या सर्विस सेगमेंट की कंपनियां बढ़ती ऑपरेशनल लागत को मैनेज करते हुए ग्रोथ रेट बनाए रख सकती हैं, और आने वाली तिमाहियों में डिवाइस मैन्युफैक्चरर्स इंटरनेशनल ट्रेड एनवायरनमेंट में कैसे एडजस्ट करते हैं।
