FY27 में भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर की 10-15% ग्रोथ का अनुमान, टेक्नोलॉजी पर फोकस

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FY27 में भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर की 10-15% ग्रोथ का अनुमान, टेक्नोलॉजी पर फोकस

भारतीय हॉस्पिटल और फार्मा सेक्टर अब टेक्नोलॉजी-संचालित ग्रोथ मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। अस्पतालों को FY27 में 10-15% ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि फार्मा कंपनियां स्पेशियलिटी दवाओं और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए 5-15% का लक्ष्य रख रही हैं।

हॉस्पिटल सेक्टर का विस्तार

वित्तीय वर्ष 2027 के लिए हॉस्पिटल इंडस्ट्री में 10% से 15% की ग्रोथ का अनुमान है। इस ग्रोथ को प्राइवेट इक्विटी (PE) की दिलचस्पी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले कैपिटल खर्च से बल मिलेगा। कंपनियां रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट जैसी स्पेशियलिटी मेडिकल सुविधाओं में निवेश बढ़ा रही हैं। 55% से ज़्यादा हॉस्पिटल आधुनिक एंटरप्राइज सिस्टम को इंटीग्रेट कर रहे हैं और नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज जैसे सरकारी हेल्थ प्लेटफॉर्म के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी की तैयारी में हैं। प्रति 1,000 लोगों पर हॉस्पिटल बेड की मौजूदा संख्या 1.6 है, जो विस्तार के लिए काफी गुंजाइश दिखाती है, खासकर बड़े शहरों के बाहर।

फार्मा इंडस्ट्री का इनोवेशन पर जोर

फार्मा सेक्टर भी FY27 के लिए 5% से 15% के बीच ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। पारंपरिक जेनेरिक दवा निर्माण से आगे बढ़कर, कंपनियां बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और नई केमिकल एंटिटीज जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही हैं। इसका मकसद वैश्विक अवसरों का फायदा उठाना है, जैसे कि आने वाला पेटेंट क्लिफ, जहां पुरानी दवाओं के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने से जेनेरिक और बायोसिमिलर निर्माताओं के लिए जगह बनेगी। लगभग 55% फार्मा लीडर्स अगले तीन सालों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को 10% से 30% तक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

हेल्थकेयर इकोनॉमिक्स में बदलाव

हाल के वर्षों में भारत में हेल्थकेयर की फंडिंग में सकारात्मक बदलाव आया है। आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च (जो लोग इलाज के लिए सीधे भुगतान करते हैं) FY15 में 60% से घटकर हाल के आंकड़ों में 40% से नीचे आ गया है। इसका मुख्य कारण इंश्योरेंस कवरेज का बढ़ना है, जिससे ऑर्गेनाइज्ड हॉस्पिटल चेन्स के लिए रेवेन्यू का एक स्थिर आधार मिला है। ये रुझान एक सकारात्मक आउटलुक का संकेत देते हैं, हालांकि कंपनियों को नई सुविधाओं के लिए आवश्यक हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर की जटिलताओं और घरेलू व एक्सपोर्ट फार्मा बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा से निपटना होगा। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि कंपनियां इन बड़े पैमाने के विस्तार को फंड करते समय अपने डेट लेवल को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज करती हैं और क्या स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट्स की वास्तविक मांग मौजूदा आक्रामक निवेश योजनाओं से मेल खाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.