National Genetic Database: भारत सरकार का बड़ा दांव, ₹8,000 करोड़ से तैयार होगा जेनेटिक डेटाबेस

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AuthorMehul Desai|Published at:
National Genetic Database: भारत सरकार का बड़ा दांव, ₹8,000 करोड़ से तैयार होगा जेनेटिक डेटाबेस

हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए भारत सरकार **₹8,000 करोड़** के एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके तहत एक नेशनल जेनेटिक डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भारतीय आबादी के लिए सटीक इलाज (Precision Medicine) को आसान बनाना है।

काम कैसे करेगा यह प्रोजेक्ट?

सरकार इस डेटाबेस को मैनेज करने के लिए एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी (Section 8 company) बनाने की तैयारी में है। यह मॉडल इसलिए चुना गया है ताकि संस्था का पूरा ध्यान केवल मुनाफे के बजाय लंबी अवधि के वैज्ञानिक लक्ष्यों पर रहे। फिलहाल, यह प्रस्ताव Expenditure Finance Committee के पास समीक्षा के लिए है और जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है।

क्यों है इसकी जरूरत?

अब तक की जेनेटिक रिसर्च मुख्य रूप से यूरोपीय आबादी पर केंद्रित रही है। इससे भारत के लिए दिक्कत यह होती है कि कई बार सामान्य जेनेटिक बदलाव को भी बीमारी समझ लिया जाता है। सरकार की कोशिश 'GenomeIndia' और 'IndiGen' जैसे मौजूदा प्रोग्राम्स को मिलाकर एक 'रेफरेंस जीनोम' बनाने की है, जो भारतीयों की जेनेटिक विविधता को सही ढंग से दर्शा सके।

हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर पर असर

यह कदम आने वाले समय में डायग्नोस्टिक लैब्स और फार्मा कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। डेटाबेस की मदद से दुर्लभ बीमारियों की पहचान आसान होगी और दवाओं के रिसर्च में भी तेजी आएगी। साथ ही, कोविड जैसी भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए इसे देश की बायोसेंक्योरिटी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

चुनौतियां और जोखिम

इतने बड़े पैमाने पर बायोलॉजिकल डेटा को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। डेटा प्राइवेसी और एथिकल कंसर्न्स को देखते हुए सरकार को बेहद सख्त प्रोटोकॉल बनाने होंगे। निवेशकों और हेल्थकेयर सेक्टर के जानकारों की नजर अब इसके आधिकारिक रोलआउट पर है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट तकनीक और नीति के बीच के अंतर को खत्म करने की क्षमता रखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.