जेनेरिक दवाओं का तूफान: मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत के फार्मा सेक्टर में इस वक्त हलचल मची हुई है। नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) की जानी-मानी दवा Ozempic और Wegovy के जेनेरिक वर्जन अब बाजार में आ गए हैं। भारत में एक्टिव इंग्रेडिएंट (Active Ingredient) के पेटेंट (Patent) के एक्सपायर होते ही, 12 से ज़्यादा बड़ी भारतीय दवा कंपनियों ने इन दवाओं के सस्ते विकल्प पेश कर दिए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 40 से ज़्यादा कंपनियां 50 से ज़्यादा ब्रांड लॉन्च करेंगी, जिससे इलाज का खर्च 70% से 90% तक कम हो जाएगा।
कीमतों में भारी कटौती, कौन-कौन सी कंपनियां आगे?
सन फार्मा (Sun Pharma), डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज (Dr. Reddy's Laboratories), ज़ाइडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences), टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स (Torrent Pharmaceuticals), ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals), एल्केम लैबोरेटरीज (Alkem Laboratories), और एरिस लाइफसाइंसेज (Eris Lifesciences) जैसी कंपनियों ने अपने-अपने ब्रांड नामों के तहत सेमाग्लूटाइड (semaglutide) फॉर्मूलेशन पेश किए हैं।
नोवो नॉर्डिस्क की Ozempic की कीमत भारत में ₹8,800 से ₹11,175 और Wegovy की ₹10,850 से ₹16,400 प्रति माह थी। वहीं, जेनेरिक वर्जन अब लगभग ₹1,290 से ₹4,500 प्रति माह की कीमत में उपलब्ध होंगे। उदाहरण के तौर पर, नैटको फार्मा (Natco Pharma) और एरिस लाइफसाइंसेज (Eris Lifesciences) हर महीने ₹1,290 से इलाज शुरू कर रहे हैं, जबकि डॉ. रेड्डीज़ की Obeda ₹4,200 प्रति माह की दर से पेश की गई है। इस आक्रामक प्राइसिंग (Pricing) से GLP-1 सेक्टर में मरीजों की पहुंच बढ़ेगी, जो अब तक ऊंची कीमतों के कारण सीमित थी।
भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट पर भी करेंगी कब्जा
ये भारतीय दवा निर्माता सिर्फ घरेलू बाजार पर ही फोकस नहीं कर रहे हैं। वे वैश्विक मोटापे (Obesity) के बाजार, जिसका मूल्य $60 अरब से $100 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, में भी बड़ा हिस्सा हासिल करने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में कनाडा, ब्राजील, लैटिन अमेरिका और तुर्की जैसे बाजारों में भी जेनेरिक लॉन्च करने की योजनाएं हैं। सेमाग्लूटाइड की भारी मांग और इसके मुनाफे (Profit) को देखते हुए, भारतीय कंपनियों ने तेजी से कदम उठाए हैं। नोवो नॉर्डिस्क, जिसकी मार्केट कैप लगभग $163 अरब है, अब मूल्य निर्धारण (Pricing Power) के दबाव का सामना कर रही है। हालांकि अमेरिका और यूरोप में नोवो नॉर्डिस्क के मुख्य पेटेंट 2031-2032 तक वैध हैं, लेकिन भारतीय बाजार में जेनेरिक का तेजी से अपनाया जाना भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक अहम टेस्ट केस है।
नोवो नॉर्डिस्क के मार्जिन पर पड़ सकता है असर
GLP-1 बाजार में नोवो नॉर्डिस्क की मजबूत मूल्य निर्धारण शक्ति को अब चुनौती मिल रही है। दर्जनों जेनेरिक प्रतिस्पर्धियों का बाजार में आना, जिनमें कई कंपनियां ₹59,000 करोड़ से ₹1.4 लाख करोड़ तक की मार्केट कैप रखती हैं (जैसे टॉरेंट फार्मा ~₹1.4 लाख करोड़, ज़ाइडस लाइफसाइंसेज ~₹89,612 करोड़, ग्लेनमार्क ~₹59,646 करोड़, एल्केम ~₹61,696 करोड़), एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। भले ही ये भारतीय कंपनियाँ कम P/E मल्टीपल (जैसे ज़ाइडस ~18.16, एल्केम ~25.7) पर काम कर रही हों, लेकिन इतनी कम कीमतों पर उनका समन्वित प्रवेश नोवो नॉर्डिस्क के प्रीमियम मार्जिन के लिए जोखिम पैदा करता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि नोवो नॉर्डिस्क के मार्केट शेयर (Market Share) और भविष्य की मूल्य निर्धारण शक्ति को लेकर चिंताएं हैं, जिसके कारण कई एनालिस्ट्स ने 'होल्ड' रेटिंग दी है। नोवो नॉर्डिस्क का वर्तमान कम P/E अनुपात (लगभग 10.4-10.68) बाजार की इन्हीं चिंताओं को दर्शाता है।
बाजार पर असर और भविष्य की ग्रोथ
GLP-1 बाजार में आने वाले समय में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जो बढ़ती पहुंच और सामर्थ्य (Affordability) से प्रेरित होगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि अकेले भारतीय सेमाग्लूटाइड बाजार $1 अरब को पार कर सकता है, और कीमतों में गिरावट से वैश्विक उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारतीय निर्माताओं की इस आक्रामक जेनेरिक रणनीति से डायबिटीज (Diabetes) और मोटापे (Obesity) के इलाज का परिदृश्य बदलने की उम्मीद है, जिससे बाजार विस्तार के अवसर पैदा होंगे और नोवो नॉर्डिस्क जैसी स्थापित कंपनियों के लिए मुनाफा बनाए रखना एक चुनौती बन जाएगा।
