Divi’s Laboratories और Laurus Labs समेत प्रमुख भारतीय CRDMO कंपनियों के शेयर बुधवार को ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए। वित्त वर्ष **2027** की पहली तिमाही में **19%** की शानदार ग्रोथ ने निवेशकों का भरोसा जीत लिया है, हालांकि बाजार के जानकार बढ़ते एक्सपेंशन खर्च और अनिश्चित रेवेन्यू जैसे रिस्क पर भी नजर बनाए हुए हैं।
सेक्टर की चमक और ग्रोथ की कहानी
बुधवार के ट्रेडिंग सेशन में भारतीय कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग (CRDMO) कंपनियों के शेयरों में जोरदार एक्शन देखने को मिला। Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसे दिग्गज शेयरों ने ऑल-टाइम हाई लेवल को छुआ। इस तूफानी तेजी के पीछे का मुख्य ट्रिगर फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे हैं, जिसमें इंडस्ट्री ने 19% की सालाना ग्रोथ दर्ज की है। यह पिछले सात क्वार्टर का सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस है।
क्यों बढ़ रही है डिमांड?
ग्लोबल फार्मा सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां 'China+1' स्ट्रैटेजी अपना रही हैं, जिससे भारत को मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च हब के तौर पर फायदा मिल रहा है। इसके अलावा, पेप्टाइड्स और Antibody-Drug Conjugates (ADCs) जैसी नई और जटिल दवाओं की बढ़ती मांग से Gland Pharma और Sai Life Sciences जैसी कंपनियों के लिए काम की लंबी पाइपलाइन तैयार हो गई है।
क्या हैं निवेश के रिस्क?
तेजी के बीच निवेशकों को कुछ चुनौतियों को भी समझना होगा। CRDMO बिजनेस में रेवेन्यू अक्सर अनइवन (ऊबड़-खाबड़) रहता है। यहां कंपनियां हर महीने नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट माइलस्टोन या वैलिडेशन बैच पूरा होने पर पैसे कमाती हैं, जिससे तिमाही नतीजों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
साथ ही, ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड्स को मैच करने के लिए कंपनियों को नई फैसिलिटी और लैब बनाने में भारी खर्च करना पड़ रहा है। यह एक्सपेंशन जहां लॉन्ग टर्म में काम आएगा, वहीं शॉर्ट टर्म में कैश फ्लो और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। निवेशकों को कंपनी की एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में देरी सीधे फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर असर डाल सकती है।
