Pharma Sector: सरकार का बड़ा फैसला, अब दवाइयों के आयात के लिए खुलेंगे नए रास्ते, घटेगा लॉजिस्टिक खर्च

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Pharma Sector: सरकार का बड़ा फैसला, अब दवाइयों के आयात के लिए खुलेंगे नए रास्ते, घटेगा लॉजिस्टिक खर्च

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत दवाइयों, मेडिकल डिवाइसेज और कॉस्मेटिक्स के लिए अब कई नए एंट्री पॉइंट्स को मंजूरी दी जाएगी, जिससे फार्मा कंपनियों की लागत में कमी आएगी।

भारत सरकार देश की फार्मा सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी में है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'Drugs Rules, 1945' के नियम 43A में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस बदलाव का उद्देश्य दवाइयों और मेडिकल डिवाइसेज के आयात के लिए अधिक हवाई अड्डों, बंदरगाहों और इनलैंड कंटेनर डिपो (ICDs) को आधिकारिक एंट्री पॉइंट के रूप में अधिकृत करना है। यह कदम अगस्त 2026 में 'Drugs Technical Advisory Board (DTAB)' की सिफारिशों के बाद उठाया गया है।

आयात के लिए नए गेटवे

फिलहाल, दवा कंपनियों को आयातित माल को क्लियर कराने के लिए सीमित पोर्ट्स पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे माल को मैन्युफैक्चरिंग हब तक लाने में लंबा समय और भारी परिवहन खर्च लगता है। इस प्रस्तावित बदलाव के बाद, क्लीयरेंस की प्रक्रिया कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों के पास ही पूरी हो सकेगी। इसमें सोनीपत, दादरी, मुंद्रा, सनथ नगर और व्हाइटफील्ड जैसे प्रमुख औद्योगिक नोड्स को शामिल किया गया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इस सूची का हिस्सा है।

निवेशकों के लिए क्या है चुनौती?

हालांकि यह कदम ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ावा देगा, लेकिन दवाइयों और विशेष रूप से टेंपरेचर-सेंसिटिव मेडिकल डिवाइसेज के लिए 'कोल्ड चेन' इंफ्रास्ट्रक्चर का होना बेहद जरूरी है। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि क्या ये नए पॉइंट्स गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए जरूरी स्टोरेज सुविधाएँ विकसित कर पाते हैं। साथ ही, शुरुआत में प्रोटोकॉल बदलने के कारण कुछ देरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, जिसे मार्केट बारीकी से मॉनिटर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.