India Pharma Logistics: इलाज होगा सस्ता! लॉजिस्टिक्स में बड़ा फेरबदल, ग्लोबल मार्केट में भारत की पकड़ मजबूत

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Pharma Logistics: इलाज होगा सस्ता! लॉजिस्टिक्स में बड़ा फेरबदल, ग्लोबल मार्केट में भारत की पकड़ मजबूत
Overview

भारत के फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) ने अपने फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर के लिए लॉजिस्टिक्स (Logistics) को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस पहल का मकसद घरेलू लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत, जो ग्लोबल औसत से करीब **15%** ज्यादा है, और सप्लाई चेन की खामियों को दूर करना है।

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लॉजिस्टिक्स में बड़ा बदलाव, क्यों है जरूरी?

भारत का फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) अपने फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में लॉजिस्टिक्स (Logistics) को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े पैमाने पर स्टडी शुरू कर रहा है। दरअसल, भारत में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग (Warehousing) की लागत ग्लोबल एवरेज से लगभग 15% ज्यादा है। इसके अलावा, सामान को स्टॉक में रखने का औसत समय 98 दिन है, जो ग्लोबल बेस्ट 64 दिन के मुकाबले काफी लंबा है। यह कोशिश सिर्फ मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं के असर से निपटने से कहीं आगे जाकर, सेक्टर की पुरानी और स्ट्रक्चरल (Structural) समस्याओं को सुलझाने पर केंद्रित है। इस स्टडी का मकसद सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर और ज्यादा कॉस्ट-कम्पेटिटिव (Cost-competitive) और रेजिलिएंट (Resilient) बनाना है, ताकि भारत हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में अपनी मजबूत पहचान बना सके।

सप्लाई चेन की बाधाओं से निपटने की तैयारी

हाल ही में रेड सी (Red Sea) जैसे इलाकों में हुए डिस्टर्बेंस (Disturbance) ने इस स्टडी की जरूरत को और बढ़ा दिया है। माल ढुलाई की लागत 200-300% तक बढ़ गई है और ट्रांजिट टाइम (Transit time) दोगुना हो गया है। इन घटनाओं ने भारतीय फार्मा एक्सपोर्ट को तगड़ा झटका दिया है। कंपनियों को ज्यादा इन्वेंटरी (Inventory) रखनी पड़ रही है, जिससे सेक्टर को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। DoP इस बात को समझता है कि सिर्फ थोड़ी देर के लिए चीजों को संभालना काफी नहीं है; बल्कि रॉ मटेरियल (Raw material) की सोर्सिंग से लेकर फाइनल डिलीवरी (Final delivery) तक पूरी लॉजिस्टिक्स वैल्यू चेन (Value chain) में बड़े बदलाव की जरूरत है। इसमें ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, हैंडलिंग और रेगुलेटरी फीस (Regulatory fees) का आकलन करके कोल्ड-चेन फेलियर (Cold-chain failure) और कस्टम्स डिले (Customs delays) जैसी ऑपरेशनल बाधाओं को पहचानना शामिल है। सरकार की नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी (NLP) भी इस लक्ष्य का समर्थन करती है, जिसका मकसद कुल लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 5% से नीचे लाना है।

एक्सपोर्ट बढ़ाने और लागत घटाने की राह

जेनेरिक्स (Generics) और वैक्सीन (Vaccines) में दुनिया भर में लीडर होने के बावजूद, भारत के फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर बड़ी लॉजिस्टिकल बाधाओं का सामना कर रहे हैं, जो एक्सपोर्ट ग्रोथ को सीमित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में 15% ज्यादा लॉजिस्टिक्स लागत और लंबे इन्वेंटरी समय सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन (Profit margin) और प्राइस कम्पेटिटिवनेस (Price competitiveness) को कम करते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर (Cold chain infrastructure) बहुत कमजोर है, जो वैक्सीन जैसे तापमान-संवेदनशील उत्पादों के लिए बेहद जरूरी है। इसके चलते अनुमान है कि 25% वैक्सीन खराब हो जाती हैं। मेडटेक (MedTech) सेक्टर भी इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहा है। एडवांस्ड डिवाइस (Advanced devices) के लिए इम्पोर्ट पर निर्भरता के चलते इस सेक्टर में बड़ा ट्रेड डेफिसिट (Trade deficit) है।

गहरी जड़ों वाली समस्याओं का समाधान

हालांकि DoP की यह पहल अहम है, लेकिन इसकी सफलता गहरी जड़ों वाली समस्याओं को हल करने पर निर्भर करेगी। लगातार 15% ज्यादा लॉजिस्टिक्स लागत और लंबे इन्वेंटरी साइकिल जैसी मूलभूत समस्याएं अविकसित इंफ्रास्ट्रक्चर और बिखरे हुए सप्लाई चेन से जुड़ी हैं, न कि सिर्फ ऑपरेशनल दिक्कतें। कुछ इंडस्ट्री अभी भी मैन्युअल प्रोसेस (Manual process) पर निर्भर है, जिससे लागत और देरी बढ़ती है। इन मुद्दों को सुलझाने के लिए मजबूत पॉलिसी बदलावों और बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स हब और डिजिटल सिस्टम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी, जो नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के अनुरूप हो। यह कंसल्टेंसी (Consultancy) की फाइंडिंग्स (Findings) रियल इम्प्रूवमेंट (Improvement) लाने में अहम होंगी, खासकर कोल्ड चेन मैनेजमेंट में।

भविष्य की ओर एक कदम

DoP की यह स्टडी भारत की फार्मा और मेडटेक सप्लाई चेन को बदलने में एक बड़ा कदम साबित होगी। लॉजिस्टिक्स समस्याओं के समाधान ढूंढकर और सुझाव देकर, यह पहल लागत में बचत, बेहतर कोल्ड चेन के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार, और भारत की ग्लोबल एक्सपोर्ट कम्पेटिटिवनेस (Export competitiveness) को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। सफलता का मतलब सिर्फ मौजूदा भू-राजनीतिक संकटों के प्रभाव को कम करना ही नहीं, बल्कि बायोलॉजिक्स (Biologics), बायोसिमिलर (Biosimilars) और एडवांस्ड मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ को सपोर्ट करने वाला एक मजबूत, आधुनिक और कुशल लॉजिस्टिक्स सिस्टम बनाना भी है। इसके अपेक्षित परिणामों में भारतीय फार्मा और मेडिकल उत्पादों को विदेशों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, महंगे इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना और ग्लोबल हेल्थकेयर मार्केट में एक मजबूत स्थिति हासिल करना शामिल है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.