Dr. Reddy's Pharma: भारत बनेगा नॉन-एनिमल टेस्टिंग का लीडर? जानें पूरी बात

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Dr. Reddy's Pharma: भारत बनेगा नॉन-एनिमल टेस्टिंग का लीडर? जानें पूरी बात
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भारत की फार्मा इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आने वाला है! Dr. Reddy's Laboratories, नॉन-एनिमल मेथोडोलॉजी (NAMs) को ड्रग डिस्कवरी में अपनाने और भारत को इस क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने की मुहिम का नेतृत्व कर रहा है। एक नई रिपोर्ट ने इस दिशा में अहम सुझाव दिए हैं।

भारत की ग्लोबल महत्वाकांक्षा: दवा सुरक्षा मूल्यांकन में लीडरशिप

Dr. Reddy's Laboratories, भारत के फार्मा सेक्टर की एक दिग्गज कंपनी, देश को ड्रग डिस्कवरी में नॉन-एनिमल टेस्टिंग मेथोडोलॉजी (NAMs) को आगे बढ़ाने में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए जोर-शोर से जुटी है। कंपनी के चेयरमैन, K. Satish Reddy, के मुताबिक, एक नई रिपोर्ट इस पहल को बल दे रही है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को समर्पित केंद्रीय एजेंसियां, नए मेथड्स को मान्य करने वाले केंद्र (validation centers) और उत्कृष्टता केंद्र (centers of excellence) स्थापित करने चाहिए, जिससे आपसी सहयोग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा मिले। यह कदम ड्रग डेवलपमेंट को ज़्यादा नैतिक और संभावित रूप से ज़्यादा किफ़ायती दिशा में ले जाने का लक्ष्य रखता है, जो दुनिया भर में बढ़ते ESG (Environmental, Social, and Governance) ट्रेंड्स और रेगुलेटरी बदलावों के अनुरूप है।

NAMs का क्षेत्र: उम्मीदें और मुश्किलें

NAMs, जैसे कि 'ऑर्गेनॉइड्स' (organoids), 'ऑर्गन्स-ऑन-ए-चिप' (organs-on-a-chip) और एडवांस्ड कंप्यूटेशनल मॉडलिंग, ड्रग डेवलपमेंट के तरीकों में क्रांति ला सकते हैं। इनसे डेवलपमेंट का समय और लागत कम हो सकती है, खासकर बायोलॉजिक्स (biologics) और जेनेरिक दवाओं (generics) के लिए, जहाँ इनका इस्तेमाल आसान है। ये तरीके इंसानों से ज़्यादा मिलती-जुलती और सटीक जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि नए केमिकल ड्रग्स (novel chemical drugs) और नई मॉलिक्यूल्स की सेफ्टी जांच के लिए अभी भी जानवरों पर निर्भरता बनी हुई है। इस कमी को दूर करने के लिए अभी काफी वैज्ञानिक और रेगुलेटरी काम बाकी है, जैसा कि इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने भी माना है।

इंडस्ट्री की सक्रियता और ग्लोबल तुलना

भारत की प्रमुख फार्मा कंपनियां, जैसे Dr. Reddy's Laboratories, Biocon, Cipla, और Sun Pharma, पहले से ही NAMs को अपने रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) प्रोसेस में शामिल कर रही हैं। Dr. Reddy's Laboratories का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1.04 लाख करोड़ है और इसका TTM P/E रेश्यो 16.5 है। कंपनी अपने रेवेन्यू का 8.5% R&D पर खर्च कर रही है। वहीं, Sun Pharma, जिसका मार्केट कैप ₹4.08 लाख करोड़ से ज़्यादा है और P/E 37.4 है, और Biocon, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹59,700 करोड़ है, भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। ग्लोबल दिग्गजों की बात करें तो Roche ने पिछले 14 वर्षों में 50% तक जानवरों पर टेस्टिंग कम की है। अमेरिका में US FDA Modernization Act 2.0 के तहत नए ड्रग एप्लिकेशन्स के लिए जानवरों पर टेस्टिंग की संघीय अनिवार्यता को हटाया जाना, वैश्विक रेगुलेटरी बदलाव का एक बड़ा संकेत है।

रेगुलेटरी विकास और भविष्य की राह

भारत का सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) भी NAMs के लिए अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को बदलने की दिशा में कदम उठा रहा है। इन वैकल्पिक तरीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए रेगुलेटरी स्पष्टता (regulatory clarity) बहुत ज़रूरी है। एनालिस्ट्स (Analysts) का Dr. Reddy's Laboratories पर मिला-जुला रुख है, कुछ को शेयर में संभावित तेजी दिख रही है, हालाँकि स्टॉक कुछ महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है और ओवरसोल्ड टेरिटरी (oversold territory) के करीब पहुंच रहा है। इसके अलावा, हाल ही में भारत सरकार द्वारा लॉन्च की गई 'Biopharma Shakti' पहल, जिसके तहत ₹10,000 करोड़ का बजट अगले 5 सालों में भारत को बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए रखा गया है, इस क्षेत्र में R&D और इनोवेशन को और तेज़ करेगी।

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