दाम में लगी आग: API की कीमतों पर सरकार का फोकस
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण भारत में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और बल्क ड्रग्स की कीमतें आसमान छू रही हैं। कुछ इनपुट लागतों में तो 200% से 300% तक का उछाल देखा गया है। इस स्थिति को देखते हुए, भारतीय सरकार 1955 के एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट (ECA) जैसे उपायों पर विचार कर रही है ताकि इन ज़रूरी चीजों के दाम को काबू में रखा जा सके।
चीन पर निर्भरता और 'Pharmacy of the World' पर संकट
भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में एक बड़ी शक्ति है, जिसे 'Pharmacy of the World' भी कहा जाता है। लेकिन, हमारी फार्मा इंडस्ट्री API और इंटरमीडिएट्स के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसका लगभग 70-85% हिस्सा चीन से आता है। पश्चिम एशिया के संकट ने पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है, जो कई API के लिए ज़रूरी हैं। नतीजतन, पैरासिटामोल API जैसी चीज़ों की कीमतें दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई हैं। यह स्थिति उत्पादन रोकने का जोखिम पैदा करती है और देश की दवाओं की सप्लाई पर असर डाल सकती है।
मार्केट में दबाव, पर ग्रोथ की उम्मीद बरकरार
इन चिंताओं के बीच, 27 मार्च 2026 को Nifty Pharma Index में मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, लॉन्ग-टर्म में इस इंडेक्स ने अच्छा रिटर्न दिया है। वर्तमान में, इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 36.01 है, जो भविष्य में ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है। लेकिन, सप्लाई की दिक्कतें और बढ़ती लागतें फिलहाल बाजार में थोड़ी सावधानी का माहौल बना रही हैं।
सरकार और इंडस्ट्री का डबल एक्शन
सरकार ECA जैसे कानूनों का इस्तेमाल कर सकती है ताकि उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित किया जा सके। इस बीच, फार्मा कंपनियां भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेटिव (PLI) जैसी सरकारी योजनाओं के सहारे, कंपनियां बैकवर्ड इंटीग्रेशन (backward integration) यानी कच्चे माल के उत्पादन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं।
भविष्य की राह: आत्मनिर्भरता और सप्लाई चेन का विविधीकरण
छोटी कंपनियों के लिए लागत का बढ़ना एक बड़ी चुनौती है, जिससे उत्पादन रुकने और नौकरियां जाने का खतरा है। भारत को अपनी 'Pharmacy of the World' की स्थिति बनाए रखने के लिए सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा और वैकल्पिक सोर्सिंग पर ध्यान देना होगा। सरकार की PLI योजनाएं घरेलू API उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।