साल 2027 में भारत में मेडिकल खर्च **10.1%** तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन आम महंगाई दर से काफी अधिक होने के कारण परिवारों और कंपनियों पर बड़ा वित्तीय दबाव पैदा हो रहा है।
Aon की नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन 2027 तक 10.1% तक पहुंच सकती है। यह राहत की बात है कि 2026 के 11.5% के मुकाबले इसमें थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह अभी भी सामान्य महंगाई दर (करीब 4%) से बहुत ज्यादा है। निवेशकों के लिए यह फासला समझना जरूरी है, क्योंकि यह न केवल घर के बजट को बिगाड़ रहा है, बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के फाइनेंशियल मॉडल को भी चुनौती दे रहा है।
क्यों बढ़ रहे हैं मेडिकल खर्च?
इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां और महंगी मेडिकल टेक्नोलॉजी है। कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर (दिल की बीमारी) और सांस से जुड़ी बीमारियों के चलते क्लेम (Claims) की संख्या में भारी उछाल आया है। जैसे-जैसे लोग बेहतर और प्रीमियम हेल्थकेयर की मांग कर रहे हैं, इलाज की लागत भी बढ़ती जा रही है। अगर मेडिकल खर्च प्रीमियम ग्रोथ से तेज बढ़ते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है, जिससे अंत में ग्राहकों का प्रीमियम बढ़ जाता है।
कंपनियों और इंश्योरेंस सेक्टर पर असर
कॉर्पोरेट इंडिया अब पारंपरिक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान से आगे बढ़कर फ्लेक्सिबल बेनिफिट्स और वेलनेस प्रोग्राम्स पर जोर दे रही है। इंश्योरेंस सेक्टर में भी अब कड़ी अंडरराइटिंग और क्लेम मैनेजमेंट पर ध्यान दिया जा रहा है। बाजार में 10% को-पेमेंट (Co-payment) स्ट्रक्चर की चर्चा भी गर्म है, जिससे इंश्योरेंस पॉलिसी के दाम और ग्राहकों के नजरिए में बड़ा बदलाव आ सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी संकेत
सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को इंश्योरेंस कंपनियों के क्लेम रेशियो (Claim Ratio) को बारीकी से देखना चाहिए। अगर यह रेशियो लगातार ऊंचा रहता है, तो कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, जो कंपनियां डेटा-ड्रिवन मैनेजमेंट के जरिए क्लेम कम करने में कामयाब होंगी, वही बाजार में बेहतर परफॉर्म करेंगी। साथ ही, रेगुलेटरी फैसलों और को-पेमेंट से जुड़ी खबरों पर अपडेट रहना बेहद जरूरी है।
