Patient Safety पर बड़ा कदम: भारत में अब इम्प्लांट्स का बनेगा नेशनल रजिस्टर!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Patient Safety पर बड़ा कदम: भारत में अब इम्प्लांट्स का बनेगा नेशनल रजिस्टर!
Overview

भारत सरकार पेशेंट सेफ्टी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए इम्प्लांटेबल मेडिकल डिवाइसेस के लिए एक नेशनल रजिस्टर स्थापित कर रही है। यह रजिस्टर डिवाइसेस और मरीजों दोनों को ट्रैक करेगा, जिसका मकसद इम्प्लांट्स के अत्यधिक इस्तेमाल और घटिया आयात को रोकना है। इससे देश के बढ़ते मेडिकल डिवाइस मार्केट के लिए पॉलिसी और प्रोक्योरमेंट को भी गाइडेंस मिलेगी।

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मेडिकल इम्प्लांट्स के लिए भारत की नई पहल: नेशनल रजिस्टर

भारत सरकार सभी इम्प्लांटेबल मेडिकल डिवाइसेस के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्टर (National Registry) बनाने जा रही है। यह कदम मरीजों की सुरक्षा और बाजार में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस सिस्टम के ज़रिए डिवाइसेस और उन्हें लगवाने वाले मरीजों, दोनों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य इम्प्लांट्स के अनावश्यक इस्तेमाल पर लगाम लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में सिर्फ उच्च-गुणवत्ता वाले, प्रमाणित डिवाइसेस ही आएं। एक सरकारी अधिकारी ने बताया है कि इस प्रस्ताव की उच्च-स्तरीय समीक्षा चल रही है और जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है। यह रजिस्टर पॉलिसी बनाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत खरीद (Procurement) में भी अहम भूमिका निभाएगा, जिससे क्वालिटी और कम लागत वाले विकल्पों के बीच अंतर करने और घटिया आयात को रोकने में मदद मिलेगी।

मार्केट की ग्रोथ और आयात पर निर्भरता

फिलहाल भारत का मेडिकल डिवाइस मार्केट $15 बिलियन का है, जिसके 2030 तक $50 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। इस ग्रोथ के बावजूद, देश हर साल एक मिलियन से ज़्यादा हाई-रिस्क इम्प्लांट्स का आयात करता है, जिसमें कार्डियक स्टेंट, ऑर्थोपेडिक जॉइंट्स और पेसमेकर शामिल हैं। यह रजिस्टर 'नेशनल मेडिकल डिवाइसेस पॉलिसी 2023' का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य बढ़ते बाजार को रेगुलेट करना है। इसमें रेगुलेटरी विसंगतियों, आयात पर निर्भरता, ऊँची कीमतों और निगरानी में कमी जैसी समस्याओं से निपटना शामिल है। यह पहल सेक्टर की ग्रोथ को मैनेज करने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर कुछ इम्प्लांट्स से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं के बाद।

चरणबद्ध शुरुआत और इंडस्ट्री का इनपुट

शुरुआत में, यह रजिस्टर कार्डियक और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स पर फोकस करेगा। इसमें मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और अस्पतालों से डेटा एकत्र किया जाएगा। बाद में, इसे सभी मेडिकल डिवाइसेस को कवर करने के लिए विस्तारित किया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइसेस इंडस्ट्री (Association of Indian Medical Devices Industry) के राजीव नाथ जैसे इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि यह रजिस्टर इम्प्लांट्स को ट्रैक करने, रिकॉल की स्थिति में मरीजों की पहचान में मदद करने, सुरक्षा की निगरानी करने और जवाबदेही के लिए सबूत जुटाने में बहुत महत्वपूर्ण है। 'मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017' (Medical Devices Rules, 2017) ने पहले ही डिवाइसेस को उनके जोखिम के अनुसार वर्गीकृत करके और क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम की आवश्यकता बताकर निगरानी में सुधार किया है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आ गया है।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल लक्ष्यों को समर्थन

यह रजिस्टर 'मेक इन इंडिया' (Make in India) और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी सरकारी पहलों का भी समर्थन करता है, जिनका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। जहाँ 2023-24 में भारत के मेडिकल डिवाइस निर्यात लगभग $3.8 बिलियन थे, वहीं आयात $8.2 बिलियन रहा, जो उन्नत आयातित डिवाइसेस की निरंतर आवश्यकता को दर्शाता है। 'नेशनल मेडिकल डिवाइसेस पॉलिसी 2023' का लक्ष्य भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है, जिसमें 25 वर्षों के भीतर वैश्विक बाजार का 10-12% हिस्सा हासिल करने और 2030 तक घरेलू क्षेत्र को $50 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यह रजिस्टर भारत के मेडटेक सेक्टर में क्वालिटी, सुरक्षा और ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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