Indian Pharmacopoeia Commission ने मेडिकल डिवाइसेज के लिए सुरक्षा गाइडलाइन्स का नया वर्जन (Version 1.3) जारी किया है। अब एडवर्स इवेंट की रिपोर्टिंग पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें AI व सॉफ्टवेयर आधारित उपकरणों को भी शामिल किया गया है।
भारत सरकार ने मेडिकल उपकरणों के लिए सुरक्षा मानकों को सख्त करते हुए Materiovigilance Programme of India (MvPI) के तहत गाइडलाइन्स का नया वर्जन लॉन्च किया है। इस बदलाव के साथ ही अब पुराने पेपर-आधारित सिस्टम को खत्म कर दिया गया है और ADRMS पोर्टल के जरिए पूरी तरह से डिजिटल रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
नई रिपोर्टिंग और नियमों का बोझ
अब अस्पतालों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए रिपोर्टिंग की समय सीमा तय कर दी गई है। गंभीर मामलों (Serious Adverse Events) की जानकारी अब 15 दिन के भीतर देनी होगी, जबकि सामान्य घटनाओं या नियर-मिस के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। इस निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए अस्पतालों को 'Materiovigilance Expert Committees' बनानी होंगी, जो घटनाओं की गहन जांच करेंगी। इससे अस्पतालों के लिए अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ गया है, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त संसाधन और स्टाफ की जरूरत होगी।
AI और सॉफ्टवेयर पर बढ़ी नजर
बदलती टेक्नोलॉजी को देखते हुए सरकार ने अब AI-आधारित मेडिकल डिवाइसेज और सॉफ्टवेयर को भी निगरानी के दायरे में लिया है। जैसे-जैसे स्वास्थ्य सेवाएं डिजिटल हो रही हैं, साइबर सुरक्षा का खतरा भी बढ़ गया है। अब मैन्युफैक्चरर्स और इम्पोर्टर्स को अपने डिजिटल उत्पादों की सुरक्षा और स्थिरता के लिए सख्त जांच का सामना करना पड़ेगा।
कंपनियों और निवेशकों पर असर
Association of Indian Manufacturers of Medical Devices (AiMeD) ने डिजिटलीकरण के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन सेक्टर में इस बात की चर्चा है कि इससे ऑपरेशनल स्पीड पर क्या असर पड़ेगा। कंपनियों को अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस को और मजबूत करना होगा। निवेशकों के लिए फिलहाल देखने वाली बात यह है कि बढ़ी हुई अनुपालन लागत (Compliance Cost) क्या छोटी मेडिकल डिवाइस कंपनियों के मुनाफे पर असर डालेगी। आने वाले समय में रेगुलेटरी अथॉरिटीज द्वारा की जाने वाली कार्रवाई और डेटा प्रोसेसिंग की रफ्तार ही इस सेक्टर की चाल तय करेगी।
