केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अवैध निकोटीन पाउच की बिक्री के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि ZYN और White Fox जैसे बिना मंजूरी वाले प्रोडक्ट्स सेहत के लिए खतरनाक हैं, जिसके चलते अब देशभर में छापेमारी और कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है।
भारत सरकार ने उन निकोटीन पाउच की वितरण और बिक्री के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिन्हें घरेलू खपत के लिए अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है। 19 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक निर्देश के बाद, राज्य सरकारों को इन प्रोडक्ट्स की दुकानों और गोदामों पर छापेमारी करने और विक्रेताओं पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद आया है, जिसमें इन प्रोडक्ट्स के स्वास्थ्य पर होने वाले बुरे प्रभावों पर जोर दिया गया है।
रेगुलेटरी स्टैंड और हेल्थ रिस्क
यह कार्रवाई युवाओं में बढ़ती लत को रोकने के सरकार के बड़े प्लान का हिस्सा है। अगस्त 2026 में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत में किसी भी नए निकोटीन फॉर्मूलेशन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। डॉक्टरों का मानना है कि ये पाउच कार्डियोवैस्कुलर स्ट्रेन, लत और मुंह के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मार्केट पर असर
हालांकि ZYN (फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल) और White Fox (स्वीडिश स्मोकलेस सॉल्यूशंस) जैसे प्रोडक्ट्स भारत में कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं, फिर भी ये ग्रे मार्केट के जरिए ऑनलाइन और कुछ दुकानों पर बिक रहे थे। अब बॉम्बे हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद, ड्यूटी-फ्री शॉप्स और स्पेशलाइज्ड रिटेलर्स को भी इस प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
इस सख्त प्रवर्तन चक्र से उन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और रिटेलर्स के लिए भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है जो इन प्रोडक्ट्स को स्टॉक कर रहे थे। इन्वेंट्री सीज होने, कानूनी जुर्माने और रेपुटेशनल नुकसान का खतरा बना हुआ है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए अब राज्य स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि आने वाले समय में ये नियम और सख्त हो सकते हैं।
