Indian Companies Health Data: कर्मचारियों के स्वास्थ्य से बना रहे हैं Business Strategy, जानिए कैसे

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Companies Health Data: कर्मचारियों के स्वास्थ्य से बना रहे हैं Business Strategy, जानिए कैसे
Overview

भारतीय कंपनियाँ अब 'हेल्थ इंटेलिजेंस' का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि वे कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर बेहतर और सक्रिय निर्णय ले सकें। पिछले साल के मुकाबले, एनुअल हेल्थ चेक-अप में **48%** की बढ़ोतरी हुई है, और डॉक्टर के पास जाने की संख्या **2.5 गुना** बढ़ गई है। Gen Z इस मामले में सबसे आगे है, और **10%** से ज़्यादा कंपनियाँ अब मानसिक स्वास्थ्य (Mental Wellness) के फायदे दे रही हैं।

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हेल्थ डेटा से बदल रही है कंपनियों की रणनीति

अब भारत की कंपनियाँ सिर्फ बीमार होने पर इलाज कराने के बजाय, कर्मचारियों के स्वास्थ्य को बेहतर और सक्रिय तरीके से मैनेज करने पर ध्यान दे रही हैं। वे 'हेल्थ इंटेलिजेंस' का उपयोग करके वर्कफोर्स के लिए सही फैसले ले रही हैं और कंपनी को मजबूत बना रही हैं। पिछले साल की तुलना में, एनुअल हेल्थ चेक-अप करवाने वाले कर्मचारियों की संख्या 48% बढ़ी है, और डॉक्टर से सलाह लेने की संख्या 2.5 गुना बढ़ गई है। इसे सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों को स्वस्थ और प्रोडक्टिव रखने की कुंजी माना जा रहा है।

प्रीवेंटिव केयर का बढ़ता चलन और Gen Z की भागीदारी

इंडस्ट्री में प्रीवेंटिव केयर (Prevention Care) को अपनाने का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। हेल्थकेयर सेक्टर में यह 122% बढ़ा है, इसके बाद BFSI सेक्टर में 108% और IT/Software में 29% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह दिखाता है कि अलग-अलग इंडस्ट्रीज में हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। जनरेशन के हिसाब से भी एक बड़ा अंतर साफ दिख रहा है: पिछले दो सालों में Gen Z की भागीदारी, मिलेनियल्स और पुराने कर्मचारियों की तुलना में दोगुनी से ज़्यादा बढ़ी है। 10% से ज़्यादा कंपनियों में अब मेंटल वेलनेस (Mental Wellness) एक स्टैन्डर्ड सुविधा बन गई है, और BFSI और IT सेक्टर में Gen Z और मिलेनियल्स के बीच इसकी डिमांड बहुत ज़्यादा है। जहाँ 68% हेल्थ चेक-अप बड़े शहरों में होते हैं, वहीं अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी 32% लोग इसमें शामिल हो रहे हैं, जिससे इसकी पहुँच बढ़ रही है।

डिजिटल हेल्थ मार्केट में तेज़ी

भारत का डिजिटल हेल्थ मार्केट तेजी से फैल रहा है। यह $14.5 बिलियन (2024) से बढ़कर $106 बिलियन (2033) तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें सरकारी पहलों जैसे 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन' (Ayushman Bharat Digital Mission) का भी बड़ा योगदान है। कॉर्पोरेट वेलनेस मार्केट करीब ₹20,000 करोड़ का है, जिसे हेल्थ अवेयरनेस, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ और टैलेंट को आकर्षित करने की ज़रूरत से बढ़ावा मिल रहा है। ekincare जैसे डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, Practo, HealthifyMe और MediBuddy जैसे बड़े नामों के साथ-साथ स्पेशलाइज्ड प्रोवाइडर्स से मुकाबला कर रहे हैं। हेल्थटेक और वेलनेस में काफी इन्वेस्टमेंट आ रहा है, जिससे निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

कॉर्पोरेट वेलनेस का बदलता स्वरूप

कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम अब बेसिक चेक-अप और जिम मेंबरशिप से आगे बढ़कर फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ को कवर करने वाले कॉम्प्रिहेंसिव प्लान्स में बदल गए हैं। COVID-19 महामारी ने हेल्थ और डिजिटल सॉल्यूशंस, जैसे टेलीमेडिसिन (Telemedicine) पर ध्यान केंद्रित करने को और तेज़ किया। सरकारी नीतियाँ, जैसे नेशनल डिजिटल हेल्थ ब्लूप्रिंट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन लॉ (DPDP Act), इन सेवाओं को आकार दे रही हैं, और इनोवेशन के साथ-साथ डेटा प्राइवेसी को भी संतुलित कर रही हैं।

अभी भी मौजूद कमियाँ और चुनौतियाँ

अच्छे ट्रेंड्स के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम बने हुए हैं। हेल्थ डेटा पर बढ़ती निर्भरता प्राइवेसी को लेकर चिंताएँ बढ़ाती है, खासकर जब DPDP Act जैसे कानून विकसित हो रहे हैं। फैक्ट्री और शॉप-फ्लोर वर्कर्स के लिए एक बड़ी कमी है, जो हेल्थ डेटा में लगभग न के बराबर ( 80% से ज़्यादा अन-ग्रेडेड) हैं। रिमोट वर्कर्स की भागीदारी भी कम है, जो फॉलो-अप केयर की कमी का संकेत देता है। इससे सभी के लिए वेल-बीइंग की समान पहुँच नहीं बन पा रही है। सीनियर लीडर्स तो काफी सक्रिय हैं, लेकिन सभी कर्मचारियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचना अभी भी एक चुनौती है। डिजिटल हेल्थ में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण लगातार इनोवेशन की ज़रूरत है। कई कंपनियों के लिए इन वेलनेस प्रोग्राम्स का स्पष्ट रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) साबित करना भी एक मुश्किल काम है।

कॉर्पोरेट वेलनेस का भविष्य

भारत में प्रीवेंटिव हेल्थकेयर और कॉर्पोरेट वेलनेस सेक्टर लगातार बढ़ने के लिए तैयार हैं, अकेले वेलनेस प्लेटफॉर्म मार्केट 2032 तक $25 बिलियन तक पहुँच सकता है। भविष्य के ट्रेंड्स में पर्सनल प्रोग्राम्स के लिए AI का उपयोग, HR सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन और मापे जाने वाले परिणाम (Measurable Outcomes) शामिल होने की संभावना है। जैसे-जैसे हाइब्रिड वर्क जारी रहेगा, सीमलेस, प्राइवेट और पर्सनलाइज्ड एंगेजमेंट देने वाले डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशंस महत्वपूर्ण होंगे। मेंटल हेल्थ, फाइनेंशियल वेल-बीइंग और फ्लेक्सिबल बेनिफिट्स को इंटीग्रेट करना एक मजबूत वर्कफोर्स बनाने की रणनीतियों को और आकार देगा।

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