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India Healthcare: महंगी दवाएं, कम कवरेज! क्या भारत में मिलेगी सबको सस्ती हेल्थकेयर?

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Healthcare: महंगी दवाएं, कम कवरेज! क्या भारत में मिलेगी सबको सस्ती हेल्थकेयर?
Overview

भारत का हेल्थकेयर सेक्टर ग्रोथ तो दिखा रहा है, लेकिन आम आदमी के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी एक बड़ा सपना बनी हुई हैं। बढ़ती महंगाई और कम इंश्योरेंस कवरेज के चलते लाखों लोग आज भी इलाज का पूरा खर्च अपनी जेब से उठा रहे हैं।

हेल्थकेयर में 'यूनिवर्सल कवरेज' का संघर्ष

यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस (Universal Health Insurance) यानी सभी के लिए स्वास्थ्य बीमा का लक्ष्य भारत के लिए अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई नई पॉलिसियां और टेक्नोलॉजी आने के बावजूद, इलाज का भारी खर्च और सेवाओं की गुणवत्ता में कमी लोगों को परेशान कर रही है।

मार्केट में ग्रोथ, पर आम आदमी की जेब पर भारी

BSE Healthcare इंडेक्स, जिसकी वैल्यू करीब ₹28 लाख करोड़ है और P/E रेश्यो 36.8 है, सेक्टर की ग्रोथ की कहानी कहता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो इस सेक्टर की सालाना कमाई 21% तक बढ़ सकती है। हालांकि, Nifty Healthcare Index पर 'Strong Sell' का सिग्नल और पिछले 1 महीने में -4.71% की गिरावट चिंता बढ़ा रही है।

फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम ₹1.2 लाख करोड़ (US$12.98 बिलियन) के पार चला गया है, जो 9% की बढ़ोतरी दिखाता है। यह मांग तो दर्शाता है, लेकिन यह भी सच है कि कई परिवारों पर अभी भी फाइनेंशियल बोझ है और उन्हें व्यापक कवरेज नहीं मिल पा रहा है।

असली चुनौती: जेब से खर्च और कवरेज का गैप

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस की पैठ (penetration) बहुत कम है, सिर्फ 4.2% GDP का, जबकि ग्लोबल एवरेज 7.0% है। अमेरिका और यूके जैसे देशों का आंकड़ा इससे कहीं बेहतर है। करीब 400 मिलियन (40 करोड़) लोगों के पास अभी भी कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है।

इसी वजह से लोगों को अपनी जेब से भारी खर्च (Out-of-Pocket Expenditure - OOPE) करना पड़ता है, जो कुल हेल्थ खर्च का करीब 37% है। हालांकि, यह पिछले एक दशक के 60% से कम है, फिर भी यह एक बड़ा आंकड़ा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) जैसी पिछली कोशिशों में भी दिक्कतें आईं। 'आयुष्मान भारत' जैसी वर्तमान योजनाओं से कुछ राहत मिली है, लेकिन कई परिवारों का मेडिकल बिल का बोझ अब भी कम नहीं हुआ है।

सिस्टम की कमियां और एक्सपर्ट की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ इंश्योरेंस बढ़ाना काफी नहीं है। प्राइमरी हेल्थकेयर को मजबूत करना, खर्चों को एफिशिएंट बनाना और बेहतर गवर्नेंस (governance) भी जरूरी है। क्वालिटी और प्रोग्राम डिजाइन में अभी भी कई सुधार बाकी हैं।

GDP का 2.5% हेल्थ पर खर्च करने का सरकारी लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है, जो यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के लक्ष्यों को पीछे धकेल रहा है। Max Healthcare Institute Ltd जैसी कंपनियों का P/E रेश्यो 64.1 है (इंडस्ट्री एवरेज 55.05) लेकिन एनालिस्ट्स 'Sell' रेटिंग दे रहे हैं। छोटे शहरों में तो हालात और भी खराब हैं, जहां सिर्फ 30% लोगों के पास इंश्योरेंस पॉलिसी है।

भविष्य का रास्ता

आने वाले सालों में इंडियन हेल्थकेयर सेक्टर के 21% सालाना की दर से बढ़ने की उम्मीद है। 2026-2030 के बीच हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में 7.2% की ग्रोथ का अनुमान है। रेगुलेटर (Regulator) क्लेम प्रोसेस (claim process) को तेज करने पर काम कर रहे हैं।

लेकिन असली यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए पब्लिक हेल्थ स्पेंडिंग (public health spending) बढ़ाना और सिस्टम की खामियों को दूर करना बेहद जरूरी है।

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