फार्मा रिटेल पर सरकार का शिकंजा: अब हर मेडिकल स्टोर पर CCTV अनिवार्य
सरकार ने देश भर के मेडिकल स्टोर्स पर नकेल कस दी है। ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) ने सभी दवा दुकानों के लिए क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन (CCTV) कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि अब हर दवाई की बिक्री को CCTV में रिकॉर्ड किया जाएगा और उसकी जांच की जा सकेगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य, बिना किसी रोक-टोक के दवाईयों की बिक्री पर अंकुश लगाना और विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
क्यों लाया गया यह बदलाव?
नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) जैसी संस्थाओं ने भी इस कदम का समर्थन किया है। उनका मानना है कि प्रिस्क्रिप्शन पर मिलने वाली दवाइयों, एंटीबायोटिक्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की अवैध बिक्री को रोकने के लिए यह कदम बहुत जरूरी है, क्योंकि नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मामले बढ़ रहे हैं।
रिटेलर्स के सामने खड़ी हुईं चुनौतियां
हालांकि, इस नए नियम से दवा विक्रेताओं, खासकर छोटे और मध्यम दुकानदारों पर भारी वित्तीय और परिचालन बोझ पड़ेगा। रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (RDCA) जैसे संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 में ऐसी किसी निगरानी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
कई छोटे दवा विक्रेता, जो महीने में केवल ₹5,000 जैसा मामूली मुनाफा कमा पाते हैं, उनके लिए CCTV सिस्टम लगवाना और उसका रखरखाव करना एक बड़ा आर्थिक झटका होगा। यह नियम ऐसे छोटे व्यवसायों को प्रभावित कर सकता है और बाजार में बड़े खिलाड़ियों के एकाधिकार को बढ़ा सकता है।
राष्ट्रीय डेटा सिस्टम: दवाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग
DCC एक केंद्रीय दवा सूचना प्रणाली या पोर्टल बनाने की भी योजना बना रहा है। इसका लक्ष्य पूरे देश में दवाओं का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है, जिससे नियंत्रित पदार्थों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सके। वर्तमान में, भारत में दवा संबंधी जानकारी राज्यों के अलग-अलग सिस्टम में बंटी हुई है। इस कदम से हेल्थकेयर का डिजिटलीकरण बढ़ेगा और दवा बिक्री पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
लेकिन, इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए डेटा मानकीकरण, सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसी बड़ी चुनौतियों से पार पाना होगा। भारत की 60,000 से अधिक ब्रांडेड दवा फॉर्मूलेशन के लिए डेटा मैनेज करना एक बड़ा काम है।
आगे की राह और चिंताएं
यह नियम भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर में बढ़ती सरकारी निगरानी का हिस्सा है। सरकार हेल्थकेयर के डिजिटलीकरण पर जोर दे रही है, जैसे कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह नियम ऑनलाइन फार्मेसी पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होगा या नहीं।
रिटेलरों की मुख्य चिंता यह है कि उन पर यह वित्तीय बोझ डाला जा रहा है, जबकि ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर भी कई सवाल हैं। डेटा सुरक्षा और रोगी की गोपनीयता भी बड़ी चिंताएं हैं। यह देखना बाकी है कि सरकार छोटे दवा विक्रेताओं को कैसे सहायता देगी और इस नए नियम को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाएगी।