स्वास्थ्य मंत्रालय ने निकोटीन पाउच की अवैध बिक्री को रोकने के लिए राज्य सरकारों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने इन्हें स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना है और इनकी बिक्री रोकने के लिए छापेमारी व कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने निकोटीन पाउच के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए पूरे देश में इनकी बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। 19 सितंबर को जारी इस आदेश के तहत राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे खुदरा विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई करें, जिसमें स्टॉक जब्त करना और उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा चलाना शामिल है।
दावों को नकारा
सरकार ने उन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें निकोटीन पाउच को धूम्रपान छोड़ने का सुरक्षित विकल्प बताया जा रहा था। 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' की रिपोर्ट के अनुसार, ये उत्पाद अत्यधिक नशे की लत लगाने वाले हैं और इनका उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। बोर्ड ने भविष्य में किसी भी नई निकोटीन-आधारित फॉर्मूलेशन को मंजूरी न देने की सिफारिश की है, जिससे तंबाकू कंपनियों के लिए भारत में रास्ता बंद हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स पर भी नजर
सरकार की इस सख्ती की जद में Philip Morris International का 'Zyn' और Swedish Smokeless Solutions का 'White Fox' जैसे बड़े ब्रांड्स भी आ गए हैं। इतना ही नहीं, सरकार ड्यूटी-फ्री स्टोर्स पर भी कड़ी नजर रख रही है। हाल ही में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Adani Group द्वारा संचालित) पर इन उत्पादों की मौजूदगी पाई गई थी, जिस पर अदालत ने साफ कर दिया है कि ड्यूटी-फ्री जोन देश के कानूनों से ऊपर नहीं हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
निकोटीन-आधारित विकल्पों के खिलाफ सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि भारत में तंबाकू उद्योग के लिए नियम बेहद सख्त रहेंगे। ई-सिगरेट पर पहले से ही प्रतिबंध है, और अब निकोटीन पाउच पर यह सख्ती उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बड़ा संकेत है जो भारत में अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रही थीं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि राज्य स्तर पर यह कानून कितनी तेजी से लागू होता है और क्या लग्जरी व ड्यूटी-फ्री आउटलेट्स से भी इनका नामो-निशान मिट जाएगा।
