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Dr Reddy's को राहत! कोर्ट ने कहा - '30 दिन बेचो डायबिटीज दवा का स्टॉक', Novo Nordisk के लिए मिली-जुली खबर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Dr Reddy's को राहत! कोर्ट ने कहा - '30 दिन बेचो डायबिटीज दवा का स्टॉक', Novo Nordisk के लिए मिली-जुली खबर
Overview

दिल्ली हाई कोर्ट ने **30 मार्च, 2026** को डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr Reddy's Laboratories) के पक्ष में एक अहम फैसला सुनाया है। Novo Nordisk के 'Ozempic' ट्रेडमार्क विवाद के बीच, कोर्ट ने Dr Reddy's को अपनी डायबिटीज दवा 'OLYMVIQ' के मौजूदा स्टॉक को अगले **30 दिनों** तक बेचने की इजाजत दे दी है।

कोर्ट का फैसला: पब्लिक हेल्थ पर ट्रेडमार्क को तरजीह

दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 मार्च, 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण फैसले में Novo Nordisk के 'Ozempic' ट्रेडमार्क के अधिकार को स्वीकार करते हुए, टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए ज़रूरी सेमाग्लूटाइड (semaglutide) दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की। जस्टिस ज्योति सिंह की सिंगल बेंच ने Dr Reddy's Laboratories को अपनी सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन, जो 'OLYMVIQ' ब्रांड नाम से बेची जा रही थी, के बचे हुए स्टॉक को अगले 30 दिनों के लिए बेचने की अनुमति दी। इसके बाद, किसी भी न बिके हुए स्टॉक को सरकारी अस्पतालों में दान करना होगा।

कोर्ट का यह फैसला पब्लिक इंटरेस्ट (Public Interest) को तत्काल ट्रेडमार्क प्रवर्तन (trademark enforcement) पर प्राथमिकता देने के महत्व को दर्शाता है। कोर्ट ने माना कि 'OLYMVIQ' और 'Ozempic' के बीच Phonetic Similarity (ध्वन्यात्मक समानता) ग्राहकों को भ्रमित कर सकती है, जिसके चलते पहले Dr Reddy's को इस ब्रांड के तहत सेल्स और मार्केटिंग रोकने का आदेश दिया गया था।

हालांकि, दवा की महत्वपूर्ण प्रकृति (critical nature) और Prescription-Only Status (केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली स्थिति) जैसे कारकों ने कोर्ट को यह राहत देने के लिए प्रेरित किया। Dr Reddy's पहले ही 'Olymra' नामक एक नए ब्रांड नाम पर स्विच करने और 'OLYMVIQ' का इस्तेमाल बंद करने पर सहमत हो गई थी, जिसे Novo Nordisk ने भी स्वीकार कर लिया था। मौजूदा इन्वेंट्री का क्या होगा, यह मुख्य मुद्दा था, जिस पर Dr Reddy's ने दवा की Temperature Sensitivity (तापमान संवेदनशीलता) का हवाला दिया था।

भारत का IP और पब्लिक हेल्थ के बीच संतुलन

यह निर्णय भारत की उस स्थापित नीति के अनुरूप है जो बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के मजबूत संरक्षण को पब्लिक हेल्थ और सस्ती दवाओं तक पहुंच की आवश्यकता के साथ संतुलित करती है। भारत को 'Pharmacy of the Global South' के रूप में जाना जाता है।

भारतीय पेटेंट कानून, TRIPS समझौते के तहत, पेटेंट एवरग्रीनिंग (patent evergreening) को रोकने के लिए धारा 3(d) जैसे प्रावधानों का उपयोग करता है और कुछ परिस्थितियों में कंपल्सरी लाइसेंसिंग (compulsory licensing) की भी अनुमति देता है, जो देश की पब्लिक हेल्थ के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करता है।

बाज़ार में तेज़ी और कंपनियों की स्थिति

टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामलों के कारण सेमाग्लूटाइड (semaglutide) का ग्लोबल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2035 तक $93 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। Novo Nordisk की Ozempic इस बाजार में एक प्रमुख दवा है।

Novo Nordisk, जो डायबिटीज और मोटापे की देखभाल में एक वैश्विक लीडर है, ने Ozempic और Wegovy से भारी राजस्व वृद्धि देखी है। कंपनी का P/E Ratio लगभग 10.3 है और इसका शेयर लगभग $36.98 पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, हाल ही में Novo Nordisk को भारतीय निर्माताओं जैसे Dr Reddy's, Sun Pharma और Zydus से प्रतिस्पर्धा के चलते भारत में Ozempic और Wegovy की कीमतें 48% तक कम करनी पड़ीं।

Dr Reddy's Laboratories, एक बड़ी भारतीय फार्मा कंपनी, की मार्केट कैप लगभग $11.41 billion है और इसका P/E Ratio लगभग 18.3 है। इसका शेयर लगभग ₹1,217.30 पर है। भारतीय डायबिटीज दवा बाजार के 2031 तक $2.16 billion से अधिक तक पहुंचने की उम्मीद है।

दोनों कंपनियों के लिए चुनौतियां

Dr Reddy's को मौजूदा स्टॉक पर राहत मिली है, लेकिन 'Olymra' में ट्रांजीशन (transition) के लिए रीब्रांडिंग, इन्वेंट्री और मार्केटिंग पर अतिरिक्त लागतें आएंगी। इसके अलावा, कोर्ट द्वारा ट्रेडमार्क उल्लंघन पाए जाने से भविष्य में और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

Novo Nordisk के लिए, फैसले ने ट्रेडमार्क की पुष्टि की, लेकिन यह भी दिखाया कि पब्लिक हेल्थ एक्सेस को प्राथमिकता देने वाले बाज़ार में विशिष्टता बनाए रखना मुश्किल है। भारत में हालिया मूल्य कटौती और जेनेरिक प्रतिस्पर्धियों के बढ़ने से Novo Nordisk को मार्जिन पर दबाव और बाजार हिस्सेदारी खोने का सामना करना पड़ रहा है।

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