Hyderabad स्थित कंपनी PopVax ने एक ऐसे mRNA वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल्स शुरू किए हैं जो फ्रिज में आसानी से स्टोर हो सकती है। यह कदम भारत को दवाओं के बड़े निर्माता से बदलकर रिसर्च और इनोवेशन का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है। हालांकि, निवेशकों को इस बदलाव के साथ जुड़े जोखिमों और भारी निवेश की जरूरतों पर भी नजर रखनी होगी।
भारत का फार्मा सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सालों तक दुनिया भर में जेनरिक दवाओं और वैक्सीन के सबसे बड़े सप्लायर के तौर पर पहचान बनाने के बाद, अब भारतीय कंपनियां हाई-वैल्यू और ओरिजिनल ड्रग डिस्कवरी की तरफ कदम बढ़ा रही हैं। इसकी एक बड़ी मिसाल Hyderabad की बायोटेक स्टार्टअप 'PopVax' है, जिसने अपनी फ्रिज-स्टेबल mRNA वैक्सीन के लिए ह्यूमन ट्रायल्स की शुरुआत कर दी है।
फ्रिज-स्टेबल तकनीक का क्या है फायदा?
आम तौर पर mRNA वैक्सीन को स्टोर करने के लिए बहुत कम तापमान (सब-जीरो) की जरूरत होती है, जिससे विकासशील देशों में इनके डिस्ट्रिब्यूशन में बड़ी चुनौतियां आती हैं। PopVax की वैक्सीन को सामान्य रेफ्रिजरेशन टेम्परेचर पर 9 महीने से ज्यादा समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह तकनीकी इनोवेशन न सिर्फ वैक्सीन की लागत को कम करेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स की मुश्किलों को भी खत्म कर देगा।
जेनरिक मॉडल से आगे बढ़ने की तैयारी
अब तक भारतीय फार्मा इंडस्ट्री सस्ती जेनरिक दवाओं पर निर्भर थी, लेकिन बढ़ते कॉम्पिटिशन और कम होते मार्जिन के कारण कंपनियों ने अब 'फर्स्ट-इन-क्लास' ड्रग डिस्कवरी पर फोकस बढ़ा दिया है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल R&D पाइपलाइन का लगभग 17% हिस्सा इन्हीं नई और ओरिजिनल दवाओं के लिए है। सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है, जिसमें ₹1,600 करोड़ के PRIP स्कीम और ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड शामिल है।
जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को यह समझना होगा कि दवा निर्माण और नई ड्रग खोज में जमीन-आसमान का अंतर है। नई खोज के रास्ते में फेल होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है और ट्रायल्स में लंबा समय लगता है। अभी भारत में करीब 225 मॉलिक्यूल्स पर काम चल रहा है, जो चीन जैसे देशों के मुकाबले काफी कम है। छोटे स्टार्टअप्स के पास पूंजी की कमी अक्सर एक बड़ा रोड़ा बनती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन सी कंपनियां लंबे समय तक टिक पा रही हैं और बड़ी फार्मा कंपनियों के साथ उनकी पार्टनरशिप की क्या संभावनाएं हैं। आने वाले समय में इन ट्रायल्स के नतीजे ही तय करेंगे कि भारत का यह 'इनोवेशन हब' बनने का सपना कितनी तेजी से सच होगा।
