IIT Madras Research Park ने 'Phyto-Innovation Accelerator' की शुरुआत की है। इसका मकसद लैब में होने वाली प्लांट सेल रिसर्च को कमर्शियल प्रोडक्ट्स में बदलना है, जो भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देगा।
IIT Madras Research Park ने आधिकारिक तौर पर 'Phyto-Innovation Accelerator' का उद्घाटन किया है। 8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी की मौजूदगी में लॉन्च हुआ यह प्रोग्राम उन रिसर्चर्स और स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी राहत है, जो अपनी लैब-विकसित तकनीकों को औद्योगिक स्तर पर ले जाना चाहते हैं।
बायोटेक स्केलिंग पर फोकस
यह एक्सेलरेटर 'Herbalife-IIT Madras Centre of Excellence' के सहयोग से काम करेगा, जो प्लांट सेल फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट है। अभी हर्बल प्रोडक्ट्स की खेती पारंपरिक कृषि चक्रों पर निर्भर है, जो अनिश्चित हो सकते हैं। यह नई पहल लैब में नियंत्रित वातावरण के जरिए हर्बल बायोमास का उत्पादन करेगी, जिससे दवा कंपनियों को कच्चा माल अधिक विश्वसनीय तरीके से मिल सकेगा।
निवेश के लिहाज से क्यों है अहम?
हालाँकि यह एक रिसर्च-आधारित पहल है और सीधे तौर पर शेयर बाजार में हलचल पैदा नहीं करेगी, लेकिन यह भारत के इंडस्ट्रियल स्ट्रेटजी में बदलाव का संकेत है। फार्मा और कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के लिए यहाँ से निकलने वाले स्टार्टअप्स भविष्य में बड़े पार्टनर या अधिग्रहण (Acquisition) का जरिया बन सकते हैं।
कमर्शियलाइजेशन की चुनौती
किसी भी बायोटेक प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'ट्रांसलेशन गैप' होता है—यानी लैब में सफल रही तकनीक को बड़े पैमाने पर कम लागत में तैयार करना। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यहाँ के स्टार्टअप्स ट्रेडिशनल सोर्स के मुकाबले अपनी प्रोसेस एफिशिएंसी (Process Efficiency) साबित कर पाते हैं या नहीं।
