IIT Kanpur ने पेटेंट की नई तकनीक: फेफड़ों के इलाज के लिए अब सुरक्षित होगी ड्रग डिलीवरी

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AuthorMehul Desai|Published at:
IIT Kanpur ने पेटेंट की नई तकनीक: फेफड़ों के इलाज के लिए अब सुरक्षित होगी ड्रग डिलीवरी

IIT Kanpur के रिसर्चर्स ने कार्बन-सिलिका कंपोजिट तकनीक के लिए पेटेंट हासिल कर लिया है। यह इनोवेशन फेफड़ों तक दवा पहुंचाने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाएगा और टिश्यू टॉक्सिसिटी को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, यह अभी एक एकेडमिक रिसर्च स्टेज पर है, इसलिए शेयर बाजार पर इसका कोई सीधा असर नहीं है।

नई तकनीक का कमाल

IIT Kanpur ने एक ऐसी नई मटेरियल टेक्नोलॉजी का 20 साल का पेटेंट हासिल किया है जो फेफड़ों में दवा पहुंचाने के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। प्रोफेसर संतोष के मिश्रा के नेतृत्व में तैयार यह कार्बन-सिलिका कंपोजिट दवा ले जाने के लिए एक 'बायोडिग्रेडेबल व्हीकल' का काम करता है।

क्यों है यह क्रांतिकारी?

पारंपरिक तरीके में इस्तेमाल होने वाले पोरस सिलिका पार्टिकल्स से अक्सर फेफड़ों में निशान (स्कारिंग) या टॉक्सिसिटी का खतरा रहता है। नई तकनीक में कार्बन को सिलिका फ्रेमवर्क के साथ सिंथेसिस के दौरान ही जोड़ा गया है, जिससे यह अधिक स्टेबल हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि दवा रिलीज होने के बाद, यह कंपोजिट अपने आप घुल जाता है और फेफड़ों में फाइब्रोसिस पैदा करने वाले प्रोटीन TGF-beta1 को ट्रिगर नहीं करता। इसके अलावा, कार्बन की मौजूदगी के कारण इसमें फ्लुओरसेंट प्रॉपर्टीज हैं, जिससे डॉक्टर इमेजिंग के जरिए दवा की लोकेशन को ट्रैक कर सकते हैं।

मार्केट के लिए क्या है संकेत?

भले ही यह बायोटेक सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह अभी एक शैक्षणिक (Academic) रिसर्च है। अभी तक इससे जुड़ी कोई भी कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। इस तकनीक को कमर्शियल रूप लेने के लिए अभी प्री-क्लिनिकल ट्रायल्स, नियामक मंजूरी और बड़े पैमाने पर क्लीनिकल वैलिडेशन जैसे कई लंबे चरणों से गुजरना होगा। फिलहाल, यह भविष्य के फार्मा ट्रेंड्स को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.