Hospital Sector: सरकारी योजनाओं में बदलाव की मांग, क्या सुधरेगा अस्पतालों का मार्जिन?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Hospital Sector: सरकारी योजनाओं में बदलाव की मांग, क्या सुधरेगा अस्पतालों का मार्जिन?

भारतीय हॉस्पिटल चेन अब CGHS जैसी सरकारी स्कीमों में 'साइंटिफिक प्राइसिंग मॉडल' की मांग कर रही हैं ताकि बढ़ती लागत के दबाव को कम किया जा सके।

भारत की दिग्गज प्राइवेट हॉस्पिटल कंपनियां अब सरकारी इलाज की रीइम्बर्समेंट (Reimbursement) दरों में बदलाव की पुरजोर मांग कर रही हैं। फोर्टिस हेल्थकेयर और अपोलो हॉस्पिटल्स जैसे बड़े नामों का तर्क है कि CGHS जैसी पुरानी और फिक्स्ड प्राइसिंग मॉडल अब आज के बढ़ते खर्चों और महंगाई के सामने टिक नहीं पा रही हैं।

मार्जिन पर बढ़ता दबाव

अस्पतालों का कहना है कि हाई-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिफाइड डॉक्टर्स और वर्ल्ड क्लास मेडिकल सुविधाओं पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि सरकार की रीइम्बर्समेंट दरें स्थिर बनी रहती हैं, तो हर मेडिकल प्रोसीजर पर मुनाफा (Profit Margin) सिकुड़ता जा रहा है।

L1 प्रोक्योरमेंट मॉडल पर सवाल

हॉस्पिटल सेक्टर केवल कीमतों से ही परेशान नहीं है, बल्कि सरकार के 'L1' (Lowest Bidder) मॉडल को भी चुनौती दी जा रही है। इस सिस्टम के तहत कॉन्ट्रैक्ट सबसे कम बोली लगाने वाले को मिलता है, जिससे बेहतर और मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी को अपनाने में बाधा आती है। अस्पताल ऑपरेटरों का मानना है कि यह सिस्टम इलाज के लॉन्ग-टर्म क्लिनिकल नतीजों से समझौता करता है।

हेल्थ इंश्योरेंस की बढ़ती चुनौतियां

सेक्टर के लिए एक और बड़ा सिरदर्द इंश्योरेंस कवर की सीमा है। अभी ज्यादातर पॉलिसी का कवर ₹5 लाख के आसपास है, जबकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज ₹25 लाख तक पहुंच चुका है। इंश्योरेंस और वास्तविक खर्च के बीच के इस भारी अंतर (Mismatch) से अस्पतालों के रेवेन्यू क्वालिटी पर असर पड़ रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इन्वेस्टर्स को यह समझना होगा कि किसी भी हॉस्पिटल चेन की प्रॉफिटेबिलिटी उसके 'केस मिक्स' यानी सरकारी बनाम प्राइवेट मरीजों के अनुपात पर निर्भर करती है। अगर सरकार रीइम्बर्समेंट स्ट्रक्चर में सुधार करती है, तो इससे सेक्टर का फाइनेंशियल मॉडल और मजबूत होगा। आने वाले समय में पॉलिसी रिफॉर्म्स पर नजर रखना निवेशकों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यही हॉस्पिटल शेयरों की ग्रोथ तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.