सरकार द्वारा एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को **30%** पर सीमित करने के बाद शुक्रवार को हॉस्पिटल शेयरों में रिकवरी देखने को मिली। इस कदम से मरीजों को सालाना **₹2,500 करोड़** की बचत होने का अनुमान है।
राहत की खबर
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 110 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले दो हफ्तों में हॉस्पिटल इंडेक्स 12% तक टूट चुका था।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बाजार में इन दवाओं पर ट्रेड मार्जिन औसतन 170% तक था, जो कुछ मामलों में 700% तक पहुँच जाता था। इस रेगुलेशन से दवाओं की कीमतों में 20% से 70% तक की कमी आने की उम्मीद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इससे मरीजों को साल भर में करीब ₹2,500 करोड़ का फायदा होगा। दवाओं की फाइनल लिस्ट 14 अक्टूबर, 2026 तक आने की संभावना है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
एनालिस्ट्स का मानना है कि यह नियम हॉस्पिटल कंपनियों के लिए 'मैनेजेबल' है। ऑन्कोलॉजी (Oncology) दवाओं का कुल रेवेन्यू में योगदान 5% से भी कम है, जिसके चलते EBITDA पर असर 2.5% से कम रहने का अनुमान है। यही वजह है कि निवेशकों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, अस्पताल की बिलिंग और दवा कीमतों पर रेगुलेटरी नजर बनी रहेगी, जिस पर निवेशकों को आगे भी ध्यान देना चाहिए।
