हिमाचल प्रदेश सरकार ने जैक्सन लैबोरेटरीज (Jackson Laboratories) की बद्दी यूनिट को मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस आंशिक रूप से बहाल कर दिया है। हालांकि, सुरक्षा मानकों पर चिंता के चलते हाई-रिस्क वाली दवाओं, जैसे कि इंजेक्टेबल स्टेरिल (sterile injectables) का प्रोडक्शन अभी भी बंद रहेगा। यह फैसला जून में कंपनी के घटिया क्वालिटी की दवाओं की जांच के बाद यूनिट को पूरी तरह से बंद करने के आदेश के बाद आया है।
रेगुलेटरी रोक और कंप्लायंस की शर्तें
इस आंशिक मंजूरी के बावजूद, कंपनी पर अभी भी कई तरह की ऑपरेशनल पाबंदियां लगी हुई हैं। फिलहाल, बद्दी यूनिट को हाई-रिस्क वाली दवाएं, खासकर स्टेरिल इंजेक्टेबल (sterile injectables) बनाने की इजाजत नहीं है। रेगुलेटरी अथॉरिटीज का कहना है कि इन प्रोडक्शन लाइनों को तभी दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा, जब यूनिट एक फ्रेश इंस्पेक्शन (fresh inspection) में सुरक्षा मानकों को पूरा करने का सबूत पेश करेगी। इतना ही नहीं, कंपनी को टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन (testosterone injections) और कुछ अन्य थियोफिलाइन फॉर्मूलेशन (theophylline formulations) सहित कई दवाओं के प्रोडक्शन की परमिशन स्थायी तौर पर कैंसिल कर दी गई है। वहीं, कैप्सूल (capsules) और आंखों की ड्रॉप्स (ophthalmic drops) जैसी दूसरी कैटेगरी के प्रोडक्शन पर भी तब तक रोक लगी रहेगी, जब तक कंपनी पिछली खामियों को दूर करने का ठोस सबूत नहीं दे देती।
क्वालिटी की चिंताओं का बैकग्राउंड
दरअसल, जून में कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को इसलिए सस्पेंड किया गया था क्योंकि राजस्थान के कोटा में मरीजों की मौत के कुछ मामलों का संबंध कंपनी द्वारा सप्लाई की गई इंजेक्शन्स से जोड़ा जा रहा था। इन घटनाओं के बाद हुई जांच में पता चला कि जिन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन (oxytocin injections) की बात हो रही थी, उनमें एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (active ingredients) की कमी थी। इससे कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी और प्रोडक्ट्स की ऑथेंटिसिटी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। हालांकि राजस्थान सरकार की जांच में कई कारणों का जिक्र था, लेकिन दवा रेगुलेटर्स के लिए फार्मा सप्लाई की क्वालिटी एक बड़ा फोकस बन गई थी।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी की पंजाब स्थित दूसरी यूनिट का लाइसेंस अभी भी पूरी तरह से कैंसिल है। पंजाब यूनिट के लाइसेंस बहाली की संभावना पर चर्चा के लिए 14 अगस्त को एक हियरिंग (hearing) होनी है। स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के लिए मुख्य चिंता यह है कि क्या कंपनी इन रेगुलेटरी इंस्पेक्शन्स (regulatory inspections) को सफलतापूर्वक पार कर पाएगी और अपनी मुख्य प्रोडक्शन साइट्स पर पूरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (manufacturing capabilities) बहाल कर पाएगी। यह अभी अनिश्चित है कि प्रतिबंधित हाई-रिस्क मैन्युफैक्चरिंग लाइन्स कब तक फिर से शुरू होंगी, और यह पूरी तरह से भविष्य के रेगुलेटरी ऑडिट (regulatory audits) और कंप्लायंस (compliance) पर निर्भर करेगा।
