Hemant Surgical के लिए बड़ी जीत: ₹264 करोड़ का सरकारी ऑर्डर
मुंबई: मेडिकल उपकरण और सप्लाई के क्षेत्र में सक्रिय Hemant Surgical Industries Limited को सेंट्रल मेडिकल सर्विस सोसाइटी (CMSS) से ₹264.33 करोड़ का एक बेहद अहम परचेज ऑर्डर मिला है। CMSS, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक महत्वपूर्ण सरकारी संस्था है, इस ऑर्डर के ज़रिए कंपनी से मेडिकल उपकरण जैसे फ्लैट पैनल डिटेक्टर (Flat Panel Detector), बैटरी, राउटर और एक्स-रे जनरेटर (X-ray Generator) खरीदेगी।
यह डील Hemant Surgical के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY23) में कंपनी का कुल रेवेन्यू करीब ₹111.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट लगभग ₹7.7 करोड़ था। वहीं, FY25 के शुरुआती आंकड़े ₹106.64 करोड़ रेवेन्यू और ₹8.04 करोड़ नेट प्रॉफिट के दिख रहे हैं। ऐसे में, यह नया CMSS ऑर्डर अकेले ही कंपनी के सालाना रेवेन्यू से ढाई गुना से भी ज़्यादा है। कंपनी ने बताया है कि इस ऑर्डर को चरणबद्ध तरीके से 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा, जिससे कंपनी की आय में ज़बरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है।
सरकारी डील्स में बढ़त
यह पहली बार नहीं है जब Hemant Surgical को सरकार से इतना बड़ा ऑर्डर मिला हो। इससे पहले, सितंबर 2025 में भी कंपनी ने CMSS से ही ₹82.89 करोड़ का ऑर्डर जीता था, जो अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की सप्लाई के लिए था। सरकार से लगातार मिल रहे ये बड़े ऑर्डर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई करने में Hemant Surgical की बढ़ती क्षमता और अहमियत को दर्शाते हैं। भारत का मेडिकल डिवाइस मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसका मूल्य FY24 में अनुमानित USD 6.8 बिलियन था और 2030 तक USD 50 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 'मेक इन इंडिया' (Make in India) जैसी सरकारी पहलों से इसे और बल मिल रहा है।
पिछला रेगुलेटरी मसला
जहां Hemant Surgical ने ग्रोथ और बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, वहीं कंपनी का एक पिछला रेगुलेटरी मसला भी रहा है। 2021 में, कंपनी इंपोर्टेड इस्तेमाल किए गए हीमोडायलिसिस मशीनों (haemodialysis machines) को लेकर कस्टम्स डिस्प्यूट (customs dispute) में फंसी थी। कस्टम्स विभाग ने खतरनाक कचरे से जुड़े उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मशीनों को जब्त करने और पेनाल्टी लगाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कस्टम्स ऑर्डर को रद्द कर दिया था और रिडेम्पशन फाइन (redemption fine) की वापसी की भी इजाजत दी थी। यह घटना आयात नियमों की जटिलताओं को दर्शाती है, लेकिन यह किसी वर्तमान धोखाधड़ी या बड़े गवर्नेंस इश्यू का संकेत नहीं है।
आंकड़ों पर एक नज़र और भविष्य की राह
₹264.33 करोड़ का यह बड़ा ऑर्डर अगले दो फाइनेंशियल इयर्स में Hemant Surgical के रेवेन्यू पर ज़बरदस्त असर डालेगा। कंपनी के मैनेजमेंट के लिए इस बड़े ऑर्डर को कुशलतापूर्वक पूरा करना, वर्किंग कैपिटल (working capital) को मैनेज करना और क्वालिटी बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी ने पिछले फाइनेंशियल ईयर 2023 में 5.4% का रेवेन्यू ग्रोथ दिखाया था और नवंबर 2025 में प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (preferential allotment) के ज़रिए लगभग ₹61.53 करोड़ जुटाए थे, जिनका इस्तेमाल विस्तार और वर्किंग कैपिटल के लिए किया जाना था। यह नया ऑर्डर उस विस्तार योजना को और तेज़ी देगा।
मार्केट में स्थिति
भारतीय मेडिकल उपकरण बाज़ार काफी प्रतिस्पर्धी है, जहां मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ-साथ डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर भी मौजूद हैं। Opto Circuits (India) Ltd., Poly Medicure Ltd. और Syringe India Ltd. जैसी कंपनियां संबंधित क्षेत्रों में काम करती हैं। हालांकि इस विशेष प्रकार के एक्स-रे जनरेटर और डिटेक्टर सप्लाई के लिए सीधे तौर पर कोई खास प्रतिस्पर्धी नहीं बताया गया है, लेकिन समग्र ट्रेंड यह है कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी सरकारी नीतियों के कारण डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल रहा है। CMSS से Hemant Surgical को लगातार मिल रहे ऑर्डर इसे सरकारी प्रोक्योरमेंट (procurement) परिदृश्य में एक मज़बूत स्थिति में रखते हैं, जो शायद बड़े पब्लिक टेंडर्स (public tenders) हासिल करने में इसे प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त दिला सकता है।
CMSS से मिला यह ज़बरदस्त ऑर्डर Hemant Surgical Industries को भारत के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण सप्लायर के रूप में स्थापित करता है, जिससे आने वाले वर्षों में कंपनी को ज़बरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ और मार्केट शेयर बढ़ने की अच्छी संभावना है। निवेशक इसके एग्जीक्यूशन (execution) और वित्तीय प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र रखेंगे।