केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत मेडिकल स्टोर्स में CCTV कैमरा लगाना अनिवार्य हो सकता है। दवा कारोबारियों के संगठन AIOCD ने इसका विरोध किया है।
सरकारी नियम और सुरक्षा का दायरा
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट अमेंडमेंट पेश किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य हाई-रिस्क वाली दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाना है। नए नियमों के मुताबिक, अब रिटेल फार्मेसियों को शेड्यूल H, H1 और X कैटेगरी की दवाओं की बिक्री को रिकॉर्ड करने के लिए CCTV सिस्टम लगाना होगा। इस नियम के तहत दुकानों को कम से कम 3 महीने तक का वीडियो फुटेज स्टोर करना अनिवार्य होगा।
कारोबारियों की क्या है समस्या?
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ड्रगिस्ट्स एंड केमिस्ट्स (AIOCD) ने स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह फैसला छोटे दुकानदारों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है। AIOCD के अनुमान के मुताबिक, प्रति दुकान कैमरा और सर्वर सेटअप पर ₹50,000 से ₹1 लाख तक का खर्च आ सकता है।
ऑपरेशनल चुनौतियां और भविष्य
ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले केमिस्ट्स के लिए बिजली की कटौती और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी सबसे बड़ी रुकावटें हैं। इसके अलावा, तकनीकी स्टाफ की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि इससे रिटेल फार्मेसी सेक्टर में कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है। बड़ी फार्मेसी चेन के पास शायद पहले से इंफ्रास्ट्रक्चर हो, लेकिन उन्हें भी इन गाइडलाइंस के हिसाब से अपग्रेड करने पर खर्च करना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इसे सख्ती से लागू करती है या दुकानदारों की मांग के अनुसार नियमों में लचीलापन लाती है।
