केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को 'सिंगल-यूज़ मेडिकल डिवाइस' के दोबारा इस्तेमाल पर रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य मरीजों को संक्रमण से बचाना और बिलिंग में होने वाली धांधली को रोकना है। इस फैसले से मेडिकल कंज्यूमेबल्स की मांग बढ़ेगी, जिसका असर हॉस्पिटल चेन के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दिख सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक सख्त निर्देश जारी किया है, जिसमें अस्पतालों में सिंगल-यूज़ मेडिकल डिवाइस को दोबारा इस्तेमाल करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवा (DGHS) ने स्पष्ट किया है कि केवल एक मरीज के लिए बने उपकरणों को स्टरलाइज़ कर दोबारा इस्तेमाल करना न केवल संक्रमण के गंभीर जोखिम पैदा करता है, बल्कि इसमें बिलिंग में बड़ी अनियमितताएं भी शामिल हैं।
अस्पतालों के कामकाज पर असर
यह निर्देश कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसे महंगे मेडिकल विभागों पर केंद्रित है। अब तक, कई अस्पताल ऑपरेटिंग खर्च कम करने के लिए इन उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करते आए हैं। अब हर प्रक्रिया के लिए नए उपकरण अनिवार्य होने से अस्पतालों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर उनके ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। निवेशकों को आगामी तिमाही नतीजों में अस्पताल चेन के बढ़ते खर्चों पर नजर रखनी होगी।
मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए मौका
दूसरी तरफ, यह खबर मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों के लिए सकारात्मक है। अस्पतालों में सिंगल-यूज़ आइटम्स की खपत बढ़ने से इन कंपनियों की बिक्री में उछाल आ सकता है। जो कंपनियां हाई-एंड डिस्पोजेबल बनाती हैं, उन्हें इस अनिवार्य अनुपालन से बड़ा फायदा मिल सकता है।
नियम और कानूनी सख्ती
सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर Drugs and Cosmetics Act 1940, Medical Devices Rules 2017 और Clinical Establishments Act 2010 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। Drugs Controller General of India (DCGI) राज्य नियामकों के साथ मिलकर निरीक्षण (inspections) करेगा। Medical Technology Association of India (MTaI) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बताया है। अब देखना यह होगा कि राज्यों द्वारा इसे कितनी सख्ती से लागू किया जाता है।
