गुजरात फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) ने कोडीन आधारित कफ सिरप के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। प्रशासन ने न केवल कई फर्मों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, बल्कि हजारों की संख्या में दवा की बोतलें भी जब्त की हैं।
गुजरात फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) ने कोडीन युक्त दवाओं के गैर-कानूनी वितरण को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि ऐसी नियंत्रित दवाओं (Controlled Substances) की बिक्री केवल वैध मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन पर ही होनी चाहिए। इस कार्रवाई के तहत अहमदाबाद, गांधीनगर और मेहसाणा जैसे जिलों में बड़े स्तर पर निरीक्षण किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं।
प्रमुख कार्रवाई और जब्ती
अहमदाबाद ग्रामीण इलाके में 'बालाजी फार्मा' पर की गई छापेमारी सबसे बड़ी रही, जहां अधिकारियों ने 37,762 बोतलें 'Rexton-T Syrup' की जब्त की हैं। रेगुलेटर फिलहाल कंपनी के ट्रांजैक्शन लॉग्स की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्टॉक का मैनेजमेंट कैसे किया गया। इसके अलावा, गांधीनगर के कलोल स्थित 'हेल्थ पॉइंट फार्मा' का ड्रग सेल्स लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
इन कंपनियों पर भी नजर
इस रेगुलेटरी दायरे में अन्य फर्में भी शामिल हैं, जिनमें 'जय अंबे डिस्ट्रीब्यूटर्स', 'फॉर्मलिन लाइफसाइंसेज', 'रेन रेमेडीज', 'कैपिटल फार्मा' और 'HRDM ग्लोबल सॉल्यूशंस' का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
मार्केट और निवेशकों पर असर
राहत की बात यह है कि इस कार्रवाई की जद में आने वाली सभी कंपनियां निजी और अनलिस्टेड हैं। इस कारण भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड किसी भी बड़ी फार्मा कंपनी पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह घटना फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में बढ़ती रेगुलेटरी स्क्रूटनी का संकेत है। सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' रुख यह बताता है कि आने वाले समय में होलसेल और रिटेल डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है और ऑडिट की प्रक्रिया भी अधिक सख्त हो सकती है। छोटे फार्मा व्यवसायों के लिए अब इनवेंटरी मैनेजमेंट और प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन के नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा उनके लाइसेंस भी जोखिम में पड़ सकते हैं।
