Technology Development Board ने बेंगलुरु की स्टार्टअप Peptris Technologies के लिए **₹86 करोड़** की फंडिंग मंजूर की है। यह पैसा **₹172 करोड़** के 'VIGOR' प्रोजेक्ट के तहत AI-आधारित दवाओं की खोज और उनके क्लीनिकल टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होगा।
सरकारी मदद से नई उड़ान
भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आने वाले Technology Development Board (TDB) ने बेंगलुरु बेस्ड बायोटेक स्टार्टअप Peptris Technologies के साथ हाथ मिलाया है। इस ₹172 करोड़ के 'VIGOR' प्रोजेक्ट में सरकार ₹86 करोड़ की फंडिंग 'ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट' (optionally convertible debt) के रूप में दे रही है। इसका मतलब है कि यह लोन आगे चलकर इक्विटी में बदल सकता है, जिससे कंपनी को अपनी बैलेंस शीट को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलेगी।
क्या है VIGOR प्रोजेक्ट का लक्ष्य?
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य AI की मदद से दवाओं की खोज की प्रक्रिया को तेज करना है। फिलहाल कंपनी के पास 4 ऐसे ड्रग मॉलिक्यूल्स हैं जो शुरुआती लैब स्टेज में हैं। AI का उपयोग करके इन मॉलिक्यूल्स को सीधे क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे पारंपरिक ड्रग डिस्कवरी में लगने वाला लंबा समय बचेगा।
निवेश के जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि Peptris Technologies एक प्राइवेट स्टार्टअप है और इसके शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं हैं। बायोटेक सेक्टर में दवा बनाने का काम काफी रिस्की होता है और इसमें सफलता की दर काफी कम रहती है। कई बार दवाएं शुरुआती टेस्टिंग में ही फेल हो जाती हैं।
इसके अलावा, कंपनी अपने AI मॉडल्स को वैलिडेट करने के लिए थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशंस पर निर्भर है। इस पर निर्भरता कंपनी के लिए एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा करती है, क्योंकि लैब टेस्टिंग की क्वालिटी और समय पूरी तरह से इन बाहरी पार्टनर्स पर निर्भर करता है। अब बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि कंपनी इन 4 दवाओं को लैब से बाहर निकाल कर क्लीनिकल ट्रायल्स तक कैसे पहुंचाती है।
