Global Health लिमिटेड ने पहली तिमाही में अपने रेवेन्यू में साल-दर-साल **26.5%** की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अब **₹1,304 करोड़** हो गया है। कंपनी के नोएडा अस्पताल ने अपने EBITDA लॉस को काफी कम कर **₹5 करोड़** कर लिया है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का संकेत देता है।
कैसे बढ़ी Global Health की कमाई?
Global Health लिमिटेड, जो मेडिसिटी (Medanta) ब्रांड के तहत संचालन करती है, ने वितीय वर्ष 2027 की शुरुआत शानदार की है। कंपनी का पहली तिमाही का रेवेन्यू ₹1,304 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 26.5% ज्यादा है। इस शानदार प्रदर्शन का मुख्य कारण ऑक्यूपाइड बेड डेज़ (occupied bed days) में 21% की बढ़ोतरी और ऑक्यूपाइड बेड पर एवरेज रेवेन्यू (Average Revenue Per Occupied Bed) में 5.5% का सुधार है, जो ₹70,244 तक पहुँच गया। हालाँकि, कुल ऑक्यूपेंसी 66% पर रही, यह नए हॉस्पिटल्स के स्केल-अप (scale-up) होने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
नोएडा अस्पताल का प्रदर्शन और विस्तार
तिमाही नतीजों का एक अहम पहलू नोएडा अस्पताल का प्रदर्शन रहा है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है। इस फैसिलिटी ने तिमाही के लिए ₹5 करोड़ का EBITDA लॉस रिपोर्ट किया है, जो पिछले वितीय वर्ष की आखिरी तिमाही में दर्ज ₹23.6 करोड़ के लॉस से काफी बेहतर है। इस अवधि में 51 बेड जोड़ने के साथ, नोएडा यूनिट अब कुल 433 बेड की क्षमता के साथ काम कर रही है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसने सरकारी उपक्रमों (PSUs), कॉर्पोरेट संस्थाओं और बीमा प्रदाताओं के साथ महत्वपूर्ण एम्पैनलमेंट एग्रीमेंट (empanelment agreements) हासिल कर लिए हैं, जिससे फैसिलिटी को ऑपरेशनल ब्रेक-ईवन (operational breakeven) की ओर बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मार्जिन आउटलुक और भविष्य की ग्रोथ
आगे देखते हुए, Global Health अपनी 3,350 बेड की विस्तार पाइपलाइन (expansion pipeline) को मैनेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि जैसे-जैसे ये नए एसेट्स (assets) हायर कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (capacity utilization) पर पहुंचेंगे, कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन 25-26% की रेंज में स्थिर हो जाएंगे। कंपनी की रणनीति में मुनाफे को बढ़ाने के लिए रोबोटिक सर्जरी, ऑन्कोलॉजी (oncology) और ऑर्गन ट्रांसप्लांट (organ transplants) जैसे हाई-एक्यूटी केयर (high-acuity care) को प्राथमिकता देना शामिल है। इसके अलावा, कंपनी को उम्मीद है कि उसके बढ़ते अंतरराष्ट्रीय रोगी आधार से प्रति बेड रेवेन्यू में वृद्धि होगी, खासकर सर्विस चार्जेज में भारी बढ़ोतरी के बजाय स्पेशलाइज्ड केस मिक्स (specialized case mix) के माध्यम से।
निवेशक नोएडा फैसिलिटी में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन की गति और 3,350 बेड की पाइपलाइन की प्रगति पर नजर रख सकते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नए बेड बॉटम लाइन (bottom line) में कितनी तेजी से योगदान करते हैं, क्योंकि विस्तार से आने वाली हायर फिक्स्ड कॉस्ट (fixed costs) तब तक मार्जिन पर दबाव डाल सकती है जब तक कि फैसिलिटीज अपने लक्षित ऑक्यूपेंसी स्तर तक नहीं पहुंच जातीं।
