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India Pharma: भू-राजनीति का असर, एक्सपोर्ट पर ₹5,000 करोड़ के नुकसान का खतरा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Pharma: भू-राजनीति का असर, एक्सपोर्ट पर ₹5,000 करोड़ के नुकसान का खतरा!
Overview

India Pharma के एक्सपोर्टर्स इस समय एक बड़े संकट का सामना कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से शिपिंग की लागत आसमान छू रही है, जिससे मार्च महीने में **₹5,000 करोड़** तक के एक्सपोर्ट को खतरा पैदा हो गया है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता भारतीय फार्मा सेक्टर के एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण शिपिंग की लागतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे मार्च के महीने में एक्सपोर्ट में ₹5,000 करोड़ तक का नुकसान होने का अनुमान है। यह सेक्टर आयातित कच्चे माल, खासकर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) पर अपनी निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया है कि आयातित कच्चे माल पर निर्भरता 'जितना संभव हो' कम की जानी चाहिए। इस चिंता का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है, पिछले हफ्ते Nifty Pharma इंडेक्स 3.2% गिरा और पिछले महीने में 5% की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार की कमजोरी के संकेत दे रहा है।

बायोसिमिलर्स में ग्रोथ, पर API की लागत बढ़ी

एक तरफ जहां APIs के आयात को कम करने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत का फार्मा सेक्टर बायोसिमिलर्स जैसे हाई-वैल्यू वाले सेगमेंट में जबरदस्त ग्रोथ दिखा रहा है। अनुमान है कि इंडियन बायोसिमिलर्स मार्केट 2026 तक करीब 184 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2035 तक 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो जाएगा। यह भविष्य के लिए एक बड़ा अवसर है। हालांकि, चीन अभी भी API का एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बना हुआ है। भारत के पास दुनिया में सबसे ज्यादा API ड्रग मास्टर फाइल्स (DMFs) हैं, लेकिन 2024 में नए DMF फाइलिंग में चीन ने भारत को पीछे छोड़ दिया है। इससे संकेत मिलता है कि मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव आ रहा है। भारत की APIs और इंटरमीडिएट्स पर चीन जैसी जगहों से निर्भरता का मतलब है कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव न केवल एक्सपोर्ट शिपमेंट को जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि घरेलू निर्माण लागत को भी बढ़ा सकते हैं।

एक्सपोर्ट्स और वैल्यूएशन्स पर भू-राजनीतिक झटके

वैश्विक अस्थिरता और शिपिंग लागत में भारी वृद्धि ने भारत के फार्मा एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने माल ढुलाई (freight) के किराए को दोगुना कर दिया है, जिससे प्रति शिपमेंट $4,000 से $8,000 तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, यदि यह व्यवधान जारी रहता है, तो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और पश्चिम एशिया/उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्रों में मार्च के एक्सपोर्ट में ₹2,500 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। बढ़ी हुई लागत विशेष रूप से तापमान-संवेदनशील दवाओं के लिए चिंता का विषय है और यह भारत की प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण क्षमता को कम कर सकती है, खासकर जेनेरिक दवाओं के लिए। Sun Pharmaceutical Industries और Torrent Pharmaceuticals जैसी कंपनियों के मजबूत फाइनेंशियल के बावजूद, उनके शेयर का वैल्यूएशन (Valuation) काफी ऊंचा है। Sun Pharma करीब 37.99x के P/E पर ट्रेड कर रहा है, और Torrent 58.5x पर, जो उद्योग के औसत P/E 31.6x से काफी ऊपर है। सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण अर्निंग्स (Earnings) में किसी भी तरह की कमी के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है।

भविष्य की ग्रोथ के लिए सतर्क आशावाद

वर्तमान चुनौतियों के बावजूद, भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर का भविष्य का आउटलुक (Outlook) कुल मिलाकर सकारात्मक बना हुआ है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने 'Stable' आउटलुक बनाए रखा है और अनुमान लगाया है कि मजबूत घरेलू मांग और यूरोपीय बाजारों में बढ़त के दम पर फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए राजस्व (Revenue) में 7-9% की वृद्धि होगी। उद्योग की कुल कमाई (Earnings) में सालाना करीब 17% की वृद्धि की उम्मीद है, जो सेक्टर के लचीलेपन को दर्शाता है। अपने पूरे पोटेंशियल को हासिल करने के लिए, सेक्टर को वर्तमान भू-राजनीतिक जोखिमों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना होगा, प्रमुख इनपुट्स के लिए स्रोतों में विविधता लानी होगी, और लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए बायोसिमिलर्स जैसे हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों में निवेश जारी रखना होगा।

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