GSK अपनी ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार) क्लीनिकल ट्रायल्स की संख्या को 2027 तक बढ़ाकर लगभग 20 करने जा रही है। कंपनी का यह रणनीतिक कदम अपने मुख्य HIV ड्रग पोर्टफोलियो के पेटेंट खत्म होने से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए है।
कैंसर ड्रग्स पर बढ़ा फोकस
GlaxoSmithKline (GSK) अपने ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो को विस्तार देने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक अपने लेट-स्टेज कैंसर क्लीनिकल ट्रायल्स की संख्या को दोगुना करना है। वर्तमान में कंपनी के पास करीब 15 क्लीनिकल-स्टेज एसेट्स हैं, जिन्हें अगले साल तक बढ़ाकर 19 से 20 के बीच ले जाने की योजना है। यह बदलाव मुख्य रूप से कंपनी के HIV ड्रग पोर्टफोलियो के पेटेंट एक्सपायरी से होने वाली संभावित रेवेन्यू कमी को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।
'पेटेंट क्लिफ' की चुनौती
फार्मा इंडस्ट्री में 'पेटेंट क्लिफ' एक बड़ी चुनौती है, जहां ब्लॉकबस्टर दवाओं का कानूनी संरक्षण खत्म होते ही जेनेरिक दवाएं मार्केट में आ जाती हैं, जिससे कंपनी की सेल्स में बड़ी गिरावट आती है। चूँकि HIV फ्रैंचाइज़ी कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा जरिया है, इसलिए GSK को लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल हेल्थ बनाए रखने के लिए नए हाई-वैल्यू ट्रीटमेंट्स की सख्त जरूरत है।
एक्सीलरेटेड डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी
तेजी से बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए कंपनी अब 'एक्सीलरेटेड डेवलपमेंट' का सहारा ले रही है। इसके तहत कुछ ड्रग कैंडिडेट्स को मिड-स्टेज की बाधाओं को पार किए बिना सीधे लेट-स्टेज ट्रायल्स में शामिल किया जा रहा है। हालांकि इससे समय तो बचेगा, लेकिन इस प्रक्रिया में जोखिम भी बढ़ता है क्योंकि बिना पारंपरिक स्टेप्स के ड्रग की सफलता का अनुमान लगाना कठिन होता है। वर्तमान में फास्ट-ट्रैक पर चल रहे 7 ड्रग प्रोग्राम्स में से करीब आधे कैंसर ट्रीटमेंट से जुड़े हैं।
बड़ा निवेश और भविष्य की राह
करीब एक दशक पहले कैंसर क्षेत्र से बाहर निकलने वाली GSK ने अब फिर से इस हाई-ग्रोथ मार्केट में वापसी की है। कंपनी का ध्यान फिलहाल 'Jemperli' (dostarlimab) जैसी टारगेटेड थेरेपी पर है। 2026 की पहली छमाही में कंपनी के ऑन्कोलॉजी सेगमेंट ने £1.08 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया था। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि ऑन्कोलॉजी एक बेहद प्रतिस्पर्धी और जटिल क्षेत्र है, जहां भारी खर्च के बावजूद सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। कंपनी के भविष्य के नतीजे अब क्लीनिकल डेटा, सेफ्टी रिजल्ट्स और रेगुलेटरी मंजूरी की गति पर निर्भर करेंगे।
