GPT Healthcare लिमिटेड के 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अन-ऑडिटेड वित्तीय नतीजे सामने आए हैं, जो मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं।
कंपनी के परिचालन से रेवेन्यू (Revenue) में पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के मुकाबले 17.56% का शानदार उछाल देखने को मिला है। यह बढ़कर ₹120.16 करोड़ हो गया, जो कि पिछले साल ₹102.20 करोड़ था।
लेकिन, यह अच्छी खबर ज्यादा देर नहीं टिक पाई क्योंकि कंपनी के मुनाफे (Profit) में भारी गिरावट आई है। टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) पिछले साल की ₹12.24 करोड़ की तुलना में 23.50% गिरकर सिर्फ ₹9.37 करोड़ रह गया। इसी तरह, टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) भी 27.60% घटकर ₹12.76 करोड़ हो गया। प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹1.49 से घटकर ₹1.44 पर आ गई।
सबसे चिंताजनक बात EBITDA मार्जिन में आई बड़ी गिरावट है, जो पिछले साल की 22.24% से घटकर केवल 16.56% रह गई है। यह संकेत देता है कि कंपनी की परिचालन लागतें (Operational Costs) बढ़ गई हैं या फिर कंपनी अपनी कीमतों (Pricing) को बढ़ा पाने में संघर्ष कर रही है।
नौ महीनों (9MFY26) के नतीजों पर नजर डालें तो रेवेन्यू में 13.24% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹346.18 करोड़ रहा। हालांकि, इस अवधि में भी मुनाफा (PAT) 25.32% गिरकर ₹27.65 करोड़ रह गया, जबकि EBITDA मार्जिन 18.59% पर आ गया, जो पिछले साल 21.56% था।
इन नतीजों में एक और चिंताजनक बात यह है कि कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से भविष्य की रणनीति (Outlook) या कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए किसी स्पष्ट दिशा-निर्देश (Guidance) का अभाव है। इसके अलावा, बैलेंस शीट (Balance Sheet) और कैश फ्लो (Cash Flow) की जानकारी न होने के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति का पूरा आकलन करना मुश्किल हो रहा है।
कुल मिलाकर, रेवेन्यू में वृद्धि के बावजूद मुनाफे और मार्जिन में लगातार गिरावट GPT Healthcare के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।