J.P. Morgan की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन और ब्राजील में डायबिटीज और वेट-लॉस (Weight-loss) ड्रग्स का बाजार **2035** तक बढ़कर **$22 अरब** के पार पहुंच सकता है। इस सेक्टर में Torrent Pharmaceuticals और Divi's Laboratories जैसे दिग्गजों पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
बाजार की नई संभावना
ग्लोबल स्तर पर डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली GLP-1 एगोनिट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। J.P. Morgan का अनुमान है कि भारत, चीन और ब्राजील में यह मार्केट मौजूदा $6.6 अरब से उछलकर $22 अरब तक पहुंच जाएगा। अमेरिका के मुकाबले इन देशों में अभी इन एडवांस थेरेपी का इस्तेमाल काफी कम है, जो भविष्य में एक बड़े स्कोप की ओर इशारा करता है।
भारतीय कंपनियों के लिए मौका और चुनौती
भारत में अभी इन दवाओं का मार्केट पेनिट्रेशन 0.2% से भी कम है। हालांकि, यहां की बड़ी आबादी कंपनियों के लिए एक लंबा अवसर पैदा करती है। लेकिन राह इतनी आसान भी नहीं है—ये दवाएं सामान्य जेनेरिक दवाओं जैसी नहीं हैं। इन्हें बनाने के लिए जटिल इंजेक्टेबल डिलीवरी सिस्टम और एडवांस केमिकल मैन्युफैक्चरिंग की जरूरत होती है।
प्रमुख दावेदार और बाधाएं
- Divi's Laboratories: अपनी API मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के दम पर यह कंपनी GLP-1 पेप्टाइड सिंथेसिस में बड़ी खिलाड़ी बन सकती है।
- Torrent Pharmaceuticals: क्रोनिक थेरेपी में मजबूत पकड़ रखने के कारण यह कंपनी भी अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकती है।
हालांकि, निवेशकों को यह भी समझना होगा कि अफोर्डेबिलिटी (Affordability) सबसे बड़ी बाधा है। भारत में लोग इंजेक्टेबल के मुकाबले ओरल पिल्स को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। भविष्य में दवाओं की कीमत, पेटेंट के नियम और सरकारी प्राइस नेगोशिएशन तय करेंगे कि ये दवाएं आम आदमी की पहुंच में कितनी जल्दी आती हैं। फिलहाल, यह सेक्टर लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का संकेत तो दे रहा है, लेकिन अभी इसे मुख्यधारा में आने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और डिस्ट्रीब्यूशन पर काफी निवेश की दरकार है।
