वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं की बढ़ती मांग ने भारत में पोषण (Nutrition) से जुड़ी नौकरियों में 200% का इजाफा कर दिया है। 2024 से 2026 के बीच, हॉस्पिटल्स और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स मरीजों को लंबी अवधि का डाइट और लाइफस्टाइल सपोर्ट देने के लिए तेजी से अपनी टीमें बढ़ा रहे हैं।
हेल्थकेयर में कैसे हो रही है बंपर भर्तियां?
मोटापा प्रबंधन (Obesity Management) के लिए GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) थेरेपी के बढ़ते इस्तेमाल से भारत के हेल्थकेयर जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव आया है। जैसे-जैसे ये दवाएं ज्यादा सुलभ हो रही हैं, हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स सिर्फ प्रिस्क्रिप्शन देने से आगे बढ़कर खास भूमिकाओं की मांग बढ़ा रहे हैं, जैसे क्लिनिकल डाइटीशियन, मेडिकल न्यूट्रिशन एडवाइजर और पेशेंट एजुकेटर।
हायरिंग ट्रेंड्स और सेक्टर का विस्तार
आंकड़े बताते हैं कि न्यूट्रिशन प्रोफेशनल्स के लिए नौकरी के अवसरों में भारी उछाल आया है। रिक्रूटमेंट फर्म TeamLease की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच इस सेगमेंट में 200% का विस्तार हुआ है। 2026 की शुरुआत से इस खास क्षेत्र में मासिक जॉब ओपनिंग 25-30% तक बढ़ी हैं। हॉस्पिटल्स, वेलनेस चेन और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स क्रॉनिक मेटाबोलिक डिजीज मैनेजमेंट पर केंद्रित डेडिकेटेड डिपार्टमेंट बनाने के लिए सक्रिय रूप से भर्ती कर रहे हैं। यह बदलाव इंडस्ट्री की ओर से मल्टीडिसिप्लिनरी टीमों के साथ मरीजों को सपोर्ट करने के बड़े प्रयास को दर्शाता है, जो शुरुआती इलाज के बाद रिजल्ट्स बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
हेल्थकेयर सर्विस मॉडल्स पर असर
प्रमुख हॉस्पिटल चेन्स इस ट्रेंड का जवाब देते हुए कॉम्प्रिहेंसिव ओबेसिटी क्लिनिक्स स्थापित कर रही हैं। Fortis Hospital और Max Super Speciality Hospital जैसे संस्थानों के स्पेशलिस्ट्स एक समग्र दृष्टिकोण अपना रहे हैं, जिसमें मेडिकल ट्रीटमेंट को स्ट्रक्चर्ड डाइट, एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लॉन्ग-टर्म मॉनिटरिंग में मौजूदा गैप ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। Apollo Hospitals भी पोस्ट-ट्रीटमेंट लाइफस्टाइल मैनेजमेंट में कमियों को दूर करने के लिए इन मल्टीडिसिप्लिनरी सपोर्ट सिस्टम्स पर ध्यान केंद्रित करने वाले प्रोवाइडर्स में से एक है। डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स भी न्यूट्रिशनिस्ट्स को हायर करके रिमोट सपोर्ट की पेशकश कर रहे हैं, जिससे 2030 तक भारत के GLP-1 मार्केट में अनुमानित पांच गुना वृद्धि को पूरा करने के लिए अपनी सेवाओं को प्रभावी ढंग से स्केल किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए रणनीतिक विचार
निवेशकों के लिए, इस खास क्षेत्र का विकास प्रिवेंटिव और स्पेशलाइज्ड केयर की ओर एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है। जहां यह विस्तार हॉस्पिटल्स और हेल्थटेक कंपनियों को वेलनेस मार्केट का एक बड़ा हिस्सा कैप्चर करने की अनुमति देता है, वहीं यह नए ऑपरेशनल वैरिएबल्स भी पेश करता है। निवेशक यह ट्रैक कर सकते हैं कि क्या इन मल्टीडिसिप्लिनरी टीमों के निर्माण की लागत अल्पावधि में प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करती है। हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स की इन सेवाओं को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करने और लॉन्ग-टर्म पेशेंट आउटकम्स को साबित करने की क्षमता उनके बिजनेस परफॉर्मेंस का एक महत्वपूर्ण कारक होगी। निवेशकों को फॉलो करने के लिए अगला अपडेट आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स में मैनेजमेंट की कमेंट्री होगी, जो इन नए ओबेसिटी केयर डिपार्टमेंट्स के रेवेन्यू कंट्रीब्यूशन और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन के संबंध में जानकारी देगी।
