Fermenta Biotech को अपने प्लांट-बेस्ड Vitamin D3, Vitadee Green के लिए FSSAI से मंज़ूरी मिल गई है। यह खास इंग्रेडिएंट सोयाबीन तेल के बाई-प्रोडक्ट से बनाया गया है। इस मंज़ूरी के बाद Vitadee Green को खाने-पीने की चीज़ों और सप्लीमेंट्स में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे कंपनी की कमाई में बड़ा इज़ाफ़ा हो सकता है।
Detailed Coverage
Fermenta Biotech का नया प्रोडक्ट: Vitadee Green
Fermenta Biotech को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से अपने नए प्लांट-बेस्ड Vitamin D3 प्रोडक्ट, Vitadee Green के लिए नियामक मंज़ूरी मिल गई है। इस प्रोडक्ट को सोयाबीन तेल रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले एक बाई-प्रोडक्ट का इस्तेमाल करके बनाया गया है। कंपनी 2014 से इस प्रोसेस पर काम कर रही थी ताकि पारंपरिक एनिमल-सोर्स्ड Vitamin D3 का एक टिकाऊ (sustainable) और किफायती विकल्प तैयार किया जा सके।
कमाई पर असर और मार्केट स्ट्रैटेजी
Fermenta Biotech के लिए Vitamin D पहले से ही कमाई का सबसे बड़ा जरिया है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 70% से ज़्यादा हिस्सा है। मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने कुल ₹551 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। अब प्लांट-बेस्ड इंग्रेडिएंट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने पोर्टफोलियो में इस नए प्रोडक्ट को शामिल करके, कंपनी फूड और न्यूट्रास्यूटिकल सेक्टर में अपनी पोजीशन को और मज़बूत करना चाहती है। इस मंज़ूरी से Vitadee Green को फोर्टिफाइड दूध और खाने वाले तेल जैसे आम उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे मार्केट में इसकी पहुंच बढ़ेगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबिलिटी
मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत नागरे ने बताया है कि प्रोडक्शन प्रोसेस में सोयाबीन तेल इंडस्ट्री के बाई-प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होता है, जिससे Vitamin D3 बनाने के लिए फूड क्रॉप्स को अलग से इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। कंपनी अगले तीन महीनों में डिमांड को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना बना रही है। Fermenta Biotech के फिलहाल कुल्लू, दहेज और तिरुपति में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जबकि रिसर्च ऑपरेशन थाने में स्थित हैं।
निवेशकों के लिए जानकारी
जैसे-जैसे कंपनी अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने पर काम कर रही है, निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि फूड और सप्लीमेंट मैन्युफैक्चरर्स Vitadee Green को कितनी जल्दी अपनाते हैं और क्या यह पारंपरिक प्रोडक्ट्स की तुलना में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह कंपनी, जो पहले Duphar-Interfran Ltd की सब्सिडियरी थी, फिलहाल BSE पर लिस्टेड है और NSE पर भी लिस्टिंग की योजना बना रही है। एक अहम बात जिस पर ध्यान देना होगा, वह यह है कि इस नए प्रोडक्ट के स्केल-अप का कंपनी के कुल मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर क्या असर पड़ता है और क्या यह घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कॉम्पिटिशन में टिक पाती है। किसी भी मैन्युफैक्चरिंग-हैवी बिजनेस की तरह, कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस प्रोडक्शन कॉस्ट को मैनेज करने और अपने मुख्य Vitamin D बिजनेस के लिए लगातार डिमांड बनाए रखने में उसकी सफलता से जुड़ा रहेगा।
