भारत के फूड रेगुलेटर FSSAI ने Dior Pharmaceuticals की पंजाब स्थित यूनिट का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। कंपनी में हाइजीन और मैन्युफैक्चरिंग के नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया। इस फैसले से कंपनी के न्यूट्रास्यूटिकल प्रोडक्शन पर तुरंत रोक लग गई है और कंपनी को दोबारा काम शुरू करने के लिए रेगुलेटर से मंजूरी लेनी होगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इन सुधारों में कितना समय लेती है और इसका रेवेन्यू पर क्या असर पड़ता है।
FSSAI की बड़ी कार्रवाई
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Dior Pharmaceuticals के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। FSSAI ने पंजाब में स्थित कंपनी की न्यूट्रास्यूटिकल (nutraceutical) बनाने वाली फैक्ट्री का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रेगुलेटर द्वारा की गई जांच में सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया, जिसके चलते फैक्ट्री में सभी तरह के प्रोडक्शन पर रोक लगा दी गई है।
सुरक्षा में मिलीं गंभीर खामियां
रेगुलेटर की रिपोर्ट में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) और फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (FSMS) को बनाए रखने में बड़ी चूक का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि पंजाब स्थित प्लांट में पेस्ट कंट्रोल, इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस, सैनिटेशन और पानी की क्वालिटी मॉनिटरिंग जैसे अहम क्षेत्रों में गंभीर कमियां थीं। इसके अलावा, कंपनी प्रोडक्ट की ट्रेसिबिलिटी (traceability) और ज़रूरी रिकॉर्ड बनाए रखने में भी नाकाम रही। FSSAI ने कहा कि इन सभी दिक्कतों की वजह से पब्लिक हेल्थ को काफी खतरा था, इसलिए फैक्ट्री को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया है। फैक्ट्री तभी दोबारा काम शुरू कर पाएगी जब वह साबित कर देगी कि सभी सुरक्षा मुद्दों को ठीक कर लिया गया है।
रेगुलेटरी एक्शन और इसका असर
FSSAI का यह कदम फूड और न्यूट्रास्यूटिकल सेक्टर की उन कंपनियों के खिलाफ चल रहे सख्त अभियानों का हिस्सा है, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 का पालन नहीं कर रही हैं। हाल के महीनों में, FSSAI बाजार में पहुंचने वाले प्रोडक्ट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपभोक्ता शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई कर रहा है और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का अचानक निरीक्षण कर रहा है।
Dior Pharmaceuticals के लिए, यह सस्पेंशन प्रोडक्शन में सीधा रुकावट है। कंपनी को अब अपनी फैक्ट्री की हाइजीन और प्रोसेस कंट्रोल्स में बड़े पैमाने पर सुधार करने होंगे। ऑपरेशन्स फिर से शुरू करने के लिए कंपनी को रेगुलेटरी अथॉरिटी से दोबारा निरीक्षण और औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।
निवेशकों को किन बातों पर नज़र रखनी चाहिए?
निवेशकों और हितधारकों को कंपनी की तरफ से इन इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोसेस की खामियों को दूर करने की समय-सीमा के बारे में आधिकारिक जानकारी पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे बड़ी चिंता यह है कि फैक्ट्री बंद रहने के दौरान कंपनी को रेवेन्यू का कितना नुकसान होगा, साथ ही प्लांट को FSSAI के अनिवार्य मानकों तक लाने में कितना अतिरिक्त खर्च आएगा। ऑपरेशनल असर के अलावा, बाजार यह भी देखेगा कि इतनी बड़ी रेगुलेटरी कार्रवाई के बाद कंपनी अपनी ब्रांड इमेज और ग्राहकों का भरोसा कैसे बनाए रखती है। कंपनी की तरफ से प्लांट के कंप्लायंस स्टेटस और प्रोडक्शन दोबारा शुरू होने की संभावित समय-सीमा की आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
