Emcure Pharmaceuticals की सब्सिडियरी Gennova Biopharmaceuticals अपनी mRNA बिजनेस यूनिट को Immunoscript Life Science को ₹139 करोड़ में बेचने जा रही है। इस डील से Emcure को अपने मुख्य बायो-टेक ऑपरेशन्स, जैसे बायोसिमिलर्स पर और ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। इस सौदे के 17 जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
Emcure Pharma की बड़ी डील: Gennova अपनी mRNA यूनिट ₹139 करोड़ में बेच रही है
Emcure Pharmaceuticals की बायोटेक सब्सिडियरी, Gennova Biopharmaceuticals ने एक महत्वपूर्ण बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट किया है। कंपनी अपनी mRNA-केंद्रित बिजनेस यूनिट को Immunoscript Life Science Private Limited को ₹139 करोड़ में बेचने जा रही है। यह डील स्लम्प सेल (slump sale) के आधार पर होगी और इसके 17 जुलाई 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
मुख्य बायो-टेक ऑपरेशन्स पर फोकस
Emcure Pharmaceuticals ने बताया है कि यह डिवेस्टमेंट (divestment) कंपनी के ऑपरेशन्स को फिर से व्यवस्थित करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। mRNA बिजनेस को बेचने के बाद, Gennova अपनी रिसर्च, डेवलपमेंट और बायोसिमिलर्स जैसे अन्य बायोटेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के निर्माण पर अपने संसाधनों को और प्रभावी ढंग से केंद्रित कर पाएगी। हालांकि, महामारी के दौरान इस यूनिट ने भारत का पहला mRNA वैक्सीन विकसित किया था, लेकिन इसका वित्तीय योगदान काफी कम था। mRNA बिजनेस ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹6.47 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था, जो Emcure के कुल ₹911.58 करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का केवल 0.71% था।
नई कंपनी और मालिकाना हक
यह बिक्री एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट के तहत स्लम्प सेल के तौर पर की जा रही है। खरीदार, Immunoscript Life Science, अप्रैल 2026 में स्थापित एक नई कंपनी है। इसे संजय सिंह प्रमोट कर रहे हैं, जो पहले Gennova में डायरेक्टर रह चुके हैं। Immunoscript का बिजनेस मॉडल प्रिसिजन इम्यूनोलॉजी (precision immunology) पर आधारित होगा, जिसमें AI, बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग और बायो-मैन्युफैक्चरिंग को मिलाकर वैक्सीन और एडवांस्ड थेराप्यूटिक्स (advanced therapeutics) विकसित किए जाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों के लिए, यह कदम कंपनी के पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करने और कम योगदान वाले नॉन-कोर बिजनेस सेगमेंट से बाहर निकलने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। इस बिक्री से ₹139 करोड़ नकद प्राप्त होंगे, लेकिन डिवेस्टेड यूनिट के छोटे रेवेन्यू शेयर के कारण कंसोलिडेटेड टॉप लाइन पर इसका वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा। निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि इस डिवेस्टमेंट से प्राप्त पूंजी को कंपनी के मुख्य बायोसिमिलर प्रोजेक्ट्स में फिर से निवेश किया जाता है या नहीं। अब सभी की निगाहें 17 जुलाई 2026 की समय सीमा तक ट्रांसफर के पूरा होने और प्राप्तियों के आवंटन के संबंध में प्रबंधन से किसी भी अपडेट पर होंगी।
