भारत के ड्रग रेगुलेटर CDSCO ने HIV प्रिवेंशन ड्रग 'लेनाकापाविर' (Lenacapavir) के लिए फेज-III क्लीनिकल ट्रायल की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इससे Emcure Pharmaceuticals और Dr. Reddy's Laboratories के लिए दवा को तेजी से बाजार में उतारने का रास्ता साफ हो गया है।
भारत सरकार के ड्रग रेगुलेटर CDSCO ने फार्मा कंपनियों के लिए एक बड़ा अड़चन हटा दी है। अब जेनेरिक 'लेनाकापाविर' (Lenacapavir) के लिए स्थानीय फेज-III क्लीनिकल ट्रायल और बायोइक्विवेलेंस स्टडीज की जरूरत नहीं होगी। इस फैसले से Emcure और Dr. Reddy's Laboratories को इस दवा के रोलआउट में बड़ी मदद मिलेगी और मार्केट में आने का समय काफी कम हो जाएगा।
लागत और प्रोडक्शन पर असर
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह डेवलपमेंट बहुत महत्वपूर्ण है। विकसित देशों में लेनाकापाविर की सालाना कीमत करीब $28,000 तक है, जबकि भारत में इसका जेनेरिक वर्जन महज $40 (करीब ₹3,300) सालाना लागत में उपलब्ध होने का अनुमान है। Emcure अपनी वर्टिकल इंटीग्रेशन का फायदा उठाकर लागत को नियंत्रित कर रही है। दोनों कंपनियां Gilead Sciences के साथ 'वॉलंटरी लाइसेंसिंग' एग्रीमेंट के तहत काम कर रही हैं, जिससे वे 120 से अधिक देशों में इस दवा की सप्लाई कर सकेंगी।
रेगुलेटरी सीमाएं और मार्केट रिस्क
हालांकि यह मंजूरी एक बड़ी राहत है, लेकिन इसका दायरा सीमित है। CDSCO की इस छूट में उन मरीजों को शामिल नहीं किया गया है जिन्हें मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट HIV है या जो पहले से भारी ट्रीटमेंट ले चुके हैं। यह सीमा एड्रेसेबल मार्केट के साइज को थोड़ा प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, भारत में एंटी-रेट्रोवायरल मार्केट में काफी कॉम्पिटिशन है, जहां मार्जिन आमतौर पर काफी कम होता है।
आने वाले समय में, निवेशकों को DCGI से मिलने वाले फाइनल अप्रूवल, मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के विस्तार और मार्केट में इसकी पहुंच पर नजर रखनी चाहिए। कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री स्पष्ट करेगी कि रोलआउट की रणनीति क्या रहने वाली है।
