Eli Lilly की Mounjaro ने भारतीय फार्मा मार्केट में इतिहास रच दिया है। सालाना **₹1,256 करोड़** की बिक्री के साथ यह देश का सबसे ज्यादा बिकने वाला फार्मा ब्रांड बन गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि मरीज अब पुरानी ओरल दवाओं की जगह इंजेक्टेबल GLP-1 ट्रीटमेंट की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।
बाजार में बड़ा बदलाव
अगस्त 2026 तक के 12 महीनों के आंकड़ों पर गौर करें, तो Mounjaro की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 502% का जबरदस्त उछाल आया है। इस रफ्तार ने Augmentin और Glycomet जैसे दिग्गज ब्रांड्स को पीछे छोड़ दिया है, जो लंबे समय से मार्केट लीडर बने हुए थे। भारत में GLP-1 ट्रीटमेंट का कुल मार्केट बढ़कर ₹2,333 करोड़ हो गया है, जिसमें अकेले tirzepatide (Mounjaro का मुख्य घटक) की हिस्सेदारी 62% है। मरीज अब रोज दवा लेने के बजाय हफ्ते में एक बार लगने वाले इंजेक्शन को ज्यादा सुविधाजनक और असरदार मान रहे हैं।
ग्लोबल परफॉरमेंस और रेगुलेटरी अपडेट्स
भारत की तरह ही ग्लोबल लेवल पर भी Eli Lilly शानदार प्रदर्शन कर रही है। कंपनी ने 2026 की दूसरी तिमाही में $23.0 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो साल-दर-साल 48% की ग्रोथ है। कंपनी ने अपना पूरा साल 2026 का रेवेन्यू गाइडेंस भी बढ़ाकर $85.0 बिलियन से $87.0 बिलियन के बीच कर दिया है। साथ ही, अमेरिकी रेगुलेटर US FDA से मिली मंजूरी के बाद अब इस दवा का उपयोग टाइप-2 डायबिटीज वाले मरीजों में कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं को रोकने के लिए भी किया जा सकेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि सेल्स के आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को कुछ पहलुओं पर नजर रखनी चाहिए। सितंबर 2026 की शुरुआत में शेयर $1,150 से $1,160 के दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो अपने 52-वीक हाई ($1,292.65) से नीचे है। भविष्य के लिए रिस्क फैक्टर्स में जेनेरिक कॉम्पिटिशन का दबाव, पेटेंट एक्सपायरी और ग्लोबल प्राइसिंग पॉलिसी शामिल हैं। कंपनी रिसर्च और अधिग्रहण पर काफी पैसा खर्च कर रही है, जिसका असर शॉर्ट-टर्म अर्निंग्स पर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब प्राइसिंग स्टेबिलिटी और इस सेगमेंट में नई कॉम्पिटिशन की एंट्री पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
