Eli Lilly की बड़ी चाल! भारत बनेगा ग्लोबल Pharma सप्लाई का हब, **$1 अरब** से ज्यादा का निवेश

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Eli Lilly की बड़ी चाल! भारत बनेगा ग्लोबल Pharma सप्लाई का हब, **$1 अरब** से ज्यादा का निवेश
Overview

Eli Lilly ने भारत को अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) का एक अहम हिस्सा बनाने का फैसला किया है। कंपनी **$1 अरब** से ज्यादा का भारी निवेश करके यहां कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग (Contract Manufacturing) को बढ़ावा देगी। इस कदम का मकसद Mounjaro जैसी ब्लॉकबस्टर दवाओं की वर्ल्डवाइड सप्लाई को मजबूत करना है।

भारत बना Eli Lilly का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब

Eli Lilly अब भारत को सिर्फ एक बाजार के तौर पर नहीं, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन (Supply Chain) का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी $1 अरब से भी अधिक का निवेश कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग (Contract Manufacturing) सुविधाओं में कर रही है। यह एक बड़ा कदम है, जिसका लक्ष्य भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल करके Mounjaro और Zepbound जैसी अपनी ब्लॉकबस्टर दवाओं को दुनिया भर में एक्सपोर्ट करना है। यह फैसला भारत में Mounjaro की ज़बरदस्त कमर्शियल सफलता से प्रेरित है, जो इस क्षेत्र में कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा बन गई है। साथ ही, यह वजन घटाने वाली दवाओं की बढ़ती मांग को भी दर्शाता है। यह विस्तार कंपनी की व्यापक ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका, यूरोप और प्यूर्टो रिको में भी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश शामिल है, ताकि ऑपरेशनल तालमेल और सप्लाई चेन की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाई जा सके।

मोटापे के इलाज में 'दवाओं की जंग': Lilly का दबदबा

मोटापे के इलाज के लिए दवा बाजार में जंग छिड़ गई है, और Eli Lilly इस जंग में आक्रामक रुख अपना रही है। जहां Novo Nordisk जैसी कंपनियां कंपाउंडेड ड्रग्स (Compounded Drugs) और सप्लाई की कमी के चलते प्राइसिंग दबाव और मार्केट शेयर में कमी का सामना कर रही हैं, वहीं Lilly की Mounjaro और Zepbound जैसी डुअल-एक्शन थेरेपीज़ हेड-टू-हेड ट्रायल्स में बेहतर असर दिखा रही हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि Lilly, 2025-2026 तक GLP-1 मार्केट में Novo Nordisk को पीछे छोड़ देगी। इसके पीछे मजबूत क्लिनिकल डेटा और लगातार सप्लाई की क्षमता है। Novo Nordisk द्वारा हाल ही में की गई कीमतों में कटौती और धीमी ग्रोथ के मुकाबले Lilly तेजी से आगे बढ़ रही है। Lilly का भरोसा अपने पाइपलाइन में भी है, जिसमें ओरल ओबेसिटी ड्रग orforglipron और नई पीढ़ी की एंटी-ओबेसिटी मेडिसिन retatrutide के पॉजिटिव फेज 3 रिजल्ट्स शामिल हैं। कंपनी भारत में donanemab जैसी एडवांस थेरेपीज़ भी लाने की तैयारी कर रही है।

रणनीतिक विविधीकरण (Diversification) और मूल्यांकन (Valuation)

Eli Lilly का मार्केट वैल्यूएशन, जिसका P/E रेश्यो लगभग 45.3 है, Novo Nordisk के 13.7 से काफी ज्यादा है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन Lilly की ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की रणनीतिक दूरदर्शिता और पाइपलाइन एग्जीक्यूशन को दर्शाता है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग विस्तार के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप में भी बड़े निवेश से Lilly एक डायवर्सिफाइड मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट तैयार कर रही है। यह कदम जियोपॉलिटिकल बदलावों और मांग में उतार-चढ़ाव के खिलाफ रेजिलिएंस (Resilience) बढ़ाएगा। कंपनी का यह कदम प्रोडक्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए है, जो कि भारतीय एंटी-ओबेसिटी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण है। इस बाजार के 2033 तक 23.5% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि Lilly का वैल्यूएशन इंडस्ट्री एवरेज से ज्यादा है, एनालिस्ट्स इसे इसके फेयर P/E और ग्रोथ प्रोस्पेक्ट्स के हिसाब से अच्छा मान रहे हैं, जो डायबिटीज और ओबेसिटी सेगमेंट में इसके लीडिंग पोजीशन पर टिका है।

जोखिम (Risks) और चुनौतियां

Lilly के रणनीतिक फायदों के बावजूद, कई बड़े जोखिम भी मौजूद हैं। महत्वाकांक्षी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग विस्तार को डिमांड को पूरा करने और सप्लाई में रुकावटों से बचने के लिए निर्दोष एग्जीक्यूशन की आवश्यकता होगी। कंपाउंडेड GLP-1 ड्रग्स पर बढ़ती जांच और संभावित रेगुलेटरी बदलाव बाजार की गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत में Novo Nordisk के semaglutide पेटेंट की निकट भविष्य में समाप्ति से सस्ते जेनेरिक्स (Generics) की बाढ़ आ सकती है, जिससे प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी। Lilly की बेहतर प्रभावकारिता (Efficacy) एक सुरक्षा कवच है, लेकिन प्राइसिंग चुनौतियां, खासकर संवेदनशील बाजारों में, एक निरंतर खतरा बनी हुई हैं। कंपनी के बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट, जो ग्रोथ के लिए आवश्यक हैं, वे भी महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं जिन्हें बनाए रखने के लिए लगातार मार्केट आउटपरफॉरमेंस की आवश्यकता होगी। मौजूदा एनालिस्ट्स की आम राय 'Buy' की ओर झुकी हुई है, और एवरेज प्राइस टारगेट में अच्छी बढ़त की उम्मीद है। हालांकि, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग को बड़े पैमाने पर लागू करने की जटिलता और फार्मास्युटिकल प्रतिस्पर्धा की अप्रत्याशित प्रकृति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.