रेगुलेटर की चेतावनी, कैंपेन पर रोक
भारत में दवा कंपनियों के मार्केटिंग को लेकर कड़े नियम लागू हो रहे हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से मिली सख्त चेतावनी के बाद अमेरिकी दिग्गज फार्मा कंपनी Eli Lilly ने अपने 'We Know Now' नामक ओबेसिटी (Obesity) जागरूकता अभियान को फिलहाल रोक दिया है। इस कैंपेन का मकसद ओबेसिटी को एक पुरानी बीमारी के तौर पर पहचान दिलाना था, लेकिन रेगुलेटर को शक है कि यह अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी की दवाओं का प्रचार कर रहा है।
Mounjaro लॉन्च और अप्रत्यक्ष प्रचार का शक
यह रोक खास तौर पर इसलिए लगाई गई है क्योंकि यह कैंपेन उसी समय चल रहा था जब Eli Lilly ने मार्च 2025 में अपनी GLP-1 थेरेपी, Mounjaro, को लॉन्च किया था। अक्टूबर 2025 तक यह दवा भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा बन गई थी। हालांकि कैंपेन में Mounjaro का सीधा नाम नहीं लिया गया था, लेकिन रेगुलेटर ने ब्रांड रिकॉल (Brand Recall) की संभावनाओं पर चिंता जताई है। यह कदम भारत में प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन (Prescription Medicines) के सीधे या अप्रत्यक्ष विज्ञापन के खिलाफ कड़े नियमों को दर्शाता है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने पहले भी सरोगेट एडवरटाइजिंग (Surrogate Advertising) के मामलों में कंपनियों पर कार्रवाई की है। रेगुलेटर का रवैया अक्सर देखा जाता है कि वे मार्केटिंग गतिविधियों को देखने के बाद ही गाइडेंस जारी करते हैं।
फार्मा दिग्गजों के लिए नई चुनौतियां
इस रेगुलेटरी एक्शन से Eli Lilly के लिए भारत में परिचालन संबंधी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। यह कंपनी, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग $800 बिलियन है और P/E रेश्यो करीब 65x है, शेयर बाजार में $850 के आसपास कारोबार कर रही थी (12 मई 2026 तक)। यह खबर सामने आने के बाद निवेशकों का ध्यान इस ओर गया। विश्लेषकों का मानना है कि भारत के बढ़ते ओबेसिटी मार्केट में फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग रणनीतियों पर अब अधिक सख्ती बरती जाएगी। इस मार्केट के 2030 तक सालाना $839 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, कॉम्पिटीटर Novo Nordisk, जिसका वैल्यूएशन करीब $450 बिलियन और P/E रेश्यो लगभग 55x है (शेयर $150 के करीब), भी भारत में अपनी दवा Wegovy के लॉन्च के साथ इसी तरह के बाजार पहुंच और मूल्य निर्धारण (Pricing) की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
आगे क्या होगा?
नियामकीय अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) के इस माहौल का दीर्घकालिक असर हो सकता है। यह साफ संकेत देता है कि भविष्य में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के अप्रत्यक्ष प्रचार पर लगाम कसी जाएगी। भारत में काम करने वाली कंपनियों को ऐसे सिस्टम से निपटना होगा जहाँ डॉक्टर की सलाह और ब्रांड एसोसिएशन के बिना सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेशों को प्राथमिकता दी जाती है। DCGI से स्पष्ट दिशानिर्देशों की कमी के कारण उद्योग एक मुश्किल स्थिति में है, जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल भी नियमों का उल्लंघन मानी जा सकती हैं। यह रेगुलेटरी ओवरहैंग (Regulatory Overhang) भारत में बाजार में पैठ बनाने की रणनीतियों के लिए जोखिम पैदा करता है। Eli Lilly ने भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने और अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी ने कहा कि रेगुलेटर का मार्गदर्शन 'सार्वजनिक जागरूकता पहलों' के साथ 'असंगत' (Irreconcilable) था, जिससे DCGI से और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। उद्योग इस पर आगे के दिशानिर्देशों का इंतजार कर रहा है, क्योंकि भारत में GLP-1 थेरेपी की सफलता केवल क्लिनिकल प्रभावकारिता (Clinical Efficacy) और मूल्य निर्धारण पर ही नहीं, बल्कि इस विकसित हो रहे रेगुलेटरी परिदृश्य को प्रभावी ढंग से नेविगेट करने पर भी निर्भर करेगी।
