नकली दवाओं का जाल
Eli Lilly की सबसे पॉपुलर दवा Mounjaro® (tirzepatide), जो टाइप 2 डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होती है, अब नकली दवाओं का शिकार हो गई है। भारत के गुरुग्र्राम, हरियाणा में अधिकारियों ने Mounjaro® की नकली इंजेक्शन्स की खेप जब्त की है। Eli Lilly ने कन्फर्म किया है कि ये नकली प्रोडक्ट्स कंपनी द्वारा नहीं बनाए गए थे और न ही ये उनके ऑथराइज्ड सप्लाई चेन से आए थे। इस तरह की नकली दवाएं अक्सर भारी डिमांड और ऊंचे दामों का फायदा उठाकर बनाई जाती हैं, और ये मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब्त की गई नकली दवाओं की कीमत लगभग ₹56 लाख से ₹70 लाख के बीच बताई जा रही है। भारत में यह एक आम समस्या है, जहां महंगी दवाओं की नकली या घटिया क्वालिटी की खेप अक्सर पकड़ी जाती है।
कंपनी का आश्वासन और सुरक्षा
Eli Lilly नकली दवाओं से लड़ने के लिए रेगुलेटरी बॉडीज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इन अनअप्रूव्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस वाली दवाओं से पब्लिक हेल्थ और मरीज की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। कंपनी ने यह भी आश्वस्त किया है कि उनके असली Mounjaro® और Yurpeak® (tirzepatide का दूसरा ब्रांड) की सप्लाई ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स और लाइसेंस वाली फार्मेसी के जरिए बिना किसी रुकावट के जारी है। मरीजों को सलाह दी गई है कि वे इन दवाओं को सिर्फ डॉक्टर के पर्चे के साथ ऑफिशियल चैनल्स से ही खरीदें ताकि खतरनाक, नकली प्रोडक्ट्स से बचा जा सके।
प्रतिस्पर्धा और जांच का दायरा
यह समस्या सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। Eli Lilly के कॉम्पटीटर Novo Nordisk को भी अपनी पॉपुलर GLP-1 ड्रग्स Ozempic® और Wegovy® के नकली वर्जन ऑनलाइन और यहां तक कि यूएस और यूरोप की सप्लाई चेन में मिलने की चेतावनी देनी पड़ी है। इन दवाओं की हाई डिमांड अक्सर सप्लाई से ज़्यादा हो जाती है, जिससे अवैध बाजारों को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, GLP-1 ड्रग्स का पूरा क्लास (Class) रेगुलेटरी जांच के दायरे में है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने Eli Lilly की ओरल GLP-1 कैंडिडेट, Foundayo® के लिए और ज़्यादा सेफ्टी डेटा मांगा है, जिसमें लिवर इंजरी और कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं (Cardiovascular Events) के संभावित जोखिमों का जिक्र है। FDA इस तरह की गैर-कानूनी कॉपीकैट दवाएं बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ भी तेजी से कार्रवाई करने की योजना बना रहा है, जिसका असर इन महंगी दवाओं के मार्केट पर पड़ सकता है। यूरोपियन रेगुलेटर्स (EMA) ने भी उपभोक्ताओं को नकली वजन घटाने वाली दवाओं से जुड़े हाई रिस्क के बारे में आगाह किया है।
कमाई में बंपर उछाल, पर वैल्यूएशन की चिंता
इन चुनौतियों के बावजूद, Eli Lilly ने पहली तिमाही 2026 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 56% बढ़कर $19.8 अरब हो गया, जबकि नॉन-GAAP EPS $8.55 रहा, जो एनालिस्ट्स की उम्मीदों से बेहतर है। इस ग्रोथ में Mounjaro® की बिक्री में 125% की ज़बरदस्त बढ़त और Zepbound® में 80% की वृद्धि का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, कंपनी का स्टॉक अभी हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 39-40x है, जो हेल्थकेयर इंडस्ट्री के औसत 16.4x से काफी ऊपर है। यह हाई वैल्यूएशन भविष्य में ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है, लेकिन शेयर में किसी भी छोटी सी चूक या निगेटिव खबर से बड़ी गिरावट आ सकती है।
जोखिम और आगे की राह
नकली दवाओं का खतरा कंपनी की रेप्युटेशन और मरीज की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम है, जो विश्वास को नुकसान पहुंचा सकता है। हाई P/E रेश्यो का मतलब है कि धीमी ग्रोथ या रेगुलेटरी अड़चनें शेयर की कीमत को गिरा सकती हैं। GLP-1 ड्रग्स के मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है, और Novo Nordisk जैसी कंपनियां लगातार इनोवेशन कर रही हैं, जिससे Lilly पर मार्केट लीडरशिप और प्राइसिंग पावर बनाए रखने का दबाव है। GLP-1 ड्रग्स की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर बढ़ती रेगुलेटरी जांच, खासकर ओरल वर्जन के लिए, लागत बढ़ा सकती है या मार्केट एक्सेस को सीमित कर सकती है। इन सब चिंताओं के बावजूद, ज़्यादातर एनालिस्ट्स (लगभग 87.5%) Eli Lilly पर पॉजिटिव हैं और इसे 'Buy' या 'Overweight' रेटिंग दे रहे हैं। कंपनी ने पूरे साल 2026 के लिए अपना रेवेन्यू गाइडेंस बढ़ाकर $82.0-$85.0 अरब कर दिया है, जो लगातार ग्रोथ का भरोसा दिखाता है।
