Eli Lilly के CEO David A. Ricks ने नई दिल्ली दौरे पर भारत के वैज्ञानिक टैलेंट की तारीफ की, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि फंडिंग की कमी यहां के बायोटेक सेक्टर की ग्रोथ में सबसे बड़ा रोड़ा है।
भारत में टैलेंट और चुनौतियां
Eli Lilly के CEO David A. Ricks का मानना है कि भारत में लैबोरेटरी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में शानदार टैलेंट मौजूद है। हालांकि, उन्होंने एक कड़वी सच्चाई भी सामने रखी—भारत में शुरुआती स्टेज वाले बायोटेक रिसर्च के लिए कोई मैच्योर और सिस्टमिक फंडिंग इकोसिस्टम नहीं है। उनके मुताबिक, इसी कमी के चलते भारत का रिसर्च आउटपुट विकसित देशों की उत्पादकता की बराबरी नहीं कर पा रहा है।
कंपनी की आक्रामक ग्रोथ
Eli Lilly फिलहाल $1 ट्रिलियन से ज्यादा की मार्केट कैप वाली दिग्गज कंपनी है। इसका सारा जोर 'Mounjaro' और 'Zepbound' जैसे कार्डियोमेटाबोलिक ड्रग्स की भारी मांग को पूरा करने पर है। कंपनी ने 2026 के लिए $85 बिलियन से $87 बिलियन की रेवेन्यू गाइडेंस जारी की है, जिससे साबित होता है कि कंपनी अपने रिसर्च पाइपलाइन में नए ड्रग्स को लेकर कितनी गंभीर है।
भारत में स्ट्रैटेजी और पार्टनरशिप
कंपनी भारत को नजरअंदाज नहीं कर रही है। साल 2025 के अंत में Cipla के साथ हुई पार्टनरशिप, जिसमें 'Yurpeak' (tirzepatide) को डिस्ट्रीब्यूट किया गया, इस बात का सबूत है कि Eli Lilly भारतीय बाजार के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रही है।
निवेशकों के लिए रिस्क और फैक्ट्स
स्टॉक फिलहाल $1,150 से $1,185 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि कंपनी का सारा दारोमदार सिर्फ वजन घटाने वाली दवाओं (वेट लॉस ड्रग्स) पर टिका है। इसके अलावा, कंपनी महिला स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी भारी निवेश कर रही है, जिसके चलते IPR&D चार्जेस का दबाव मुनाफे पर दिख सकता है। आने वाले समय में कंपनी का R&D खर्च और प्रॉफिट मार्जिन के बीच का बैलेंस ही स्टॉक की चाल तय करेगा।
