एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की चिंता बढ़ी, नई दवाओं का विकास धीमा: रिपोर्ट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की चिंता बढ़ी, नई दवाओं का विकास धीमा: रिपोर्ट
Overview

दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से लड़ने की जंग कमजोर पड़ रही है। 2026 AMR Benchmark रिपोर्ट के मुताबिक, दवाओं के प्रति बढ़ता रेजिस्टेंस (resistance) इंडस्ट्री की इनोवेशन (innovation) के प्रयासों से कहीं आगे निकल गया है।

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हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का बढ़ता वैश्विक स्वास्थ्य खतरा और फार्मा कंपनियों की नई दवाएं बनाने की कोशिशों के बीच की खाई चौड़ी हो रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नए एंटीमाइक्रोबियल्स (antimicrobials) को विकसित करने का मौजूदा मॉडल इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए काफी नहीं है, और इसके लिए निवेश और सहयोग के नए तरीकों की सख्त जरूरत है।

दवाओं के विकास में बढ़ती खाई

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) तेजी से फार्मा इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया क्षमता से आगे निकल रहा है। नवीनतम AMR Benchmark रिपोर्ट में GSK और Shionogi जैसी कंपनियों के सात ऐसे प्रोजेक्ट्स का जिक्र है जो संक्रामक रोगों से लड़ने वाली नई दवाओं की अंतिम चरण की पाइपलाइन में हैं। हालांकि, ये बढ़ते खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। आज हर साल एक मिलियन से ज्यादा लोग ड्रग-रेसिस्टेंट (drug-resistant) संक्रमणों से मर रहे हैं, और यह संख्या 2050 तक दोगुना होकर बीस लाख तक पहुंचने का अनुमान है। AMR से जुड़ी कुल वार्षिक मौतें चार मिलियन (40 लाख) से बढ़कर आठ मिलियन (80 लाख) से अधिक हो सकती हैं। नई दवाओं की सिकुड़ती पाइपलाइन के साथ यह बढ़ता मृत्यु दर, इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से निपटने में एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर रहा है। उदाहरण के लिए, Shionogi का P/E ratio 14.36 है, जबकि GSK का P/E ratio 15.1 है।

सिकुड़ती पाइपलाइन और कंपनियों का प्रदर्शन

संक्रमण से लड़ने वाली नई दवाओं के विकास में काफी कमी आई है, जिसका मुख्य कारण लगातार कम निवेश और प्राइवेट सेक्टर की घटती दिलचस्पी है। 2021 की AMR Benchmark रिपोर्ट के बाद से बड़ी रिसर्च फर्मों और जेनेरिक (generic) निर्माताओं दोनों का प्रदर्शन कमजोर हुआ है। GSK और Aurobindo Pharma बच्चों के लिए सुरक्षित फॉर्मूलेशन (formulations) रजिस्टर कराने में आगे रही हैं, और Shionogi भी मजबूत प्रगति दिखा रही है। हालांकि, कुल मिलाकर इंडस्ट्री की R&D (Research & Development) आउटपुट सिकुड़ रही है। Aurobindo Pharma, जिसका P/E ratio 19.4 है, सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली फॉर्मूलेशन के लिए पहचानी जाती है, लेकिन पिछले पांच सालों में इसके ऑपरेटिंग प्रॉफिट ग्रोथ (3.23% CAGR) में मामूली बढ़त देखी गई है। छोटी बायोटेक (biotech) फर्में इनोवेशन दिखा रही हैं, लेकिन उनका सीमित दायरा उनके प्रभाव को सीमित करता है।

वैश्विक पहुंच में अभी भी कमी

एंटीमाइक्रोबियल दवाओं तक पहुंचने में अभी भी बड़ी असमानताएं मौजूद हैं। भले ही GSK, Hikma, Sandoz, Teva, और Aurobindo Pharma जैसी कंपनियों ने बच्चों के लिए सुरक्षित फॉर्मूलेशन (formulations) रजिस्टर कराए हैं, लेकिन सब-सहारा अफ्रीका (sub-Saharan Africa) जैसे देश अभी भी काफी हद तक पीछे छूट गए हैं। बच्चों के फॉर्मूलेशन के लिए लंबी अप्रूवल (approval) प्रक्रियाएं पाइपलाइन की कमी को और बढ़ाती हैं। कम और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में, जरूरी बच्चों के एंटीबायोटिक्स (antibiotics) तक पहुंच अक्सर अपर्याप्त होती है, जिससे सब-ऑप्टिमल (sub-optimal) इलाज होते हैं। ये इलाज आगे चलकर रेजिस्टेंस (resistance) को बढ़ावा दे सकते हैं और कमजोर आबादी को ज्यादा प्रभावित कर सकते हैं।

निवेश की चुनौतियां विकास में बाधा डाल रही हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम निवेश और कमजोर R&D (Research & Development) पाइपलाइन एंटीमाइक्रोबियल विकास में बाधा डाल रही है। एंटीबायोटिक्स (antibiotics) के लिए संरचनात्मक आर्थिक चुनौती यह है कि क्रोनिक (chronic) बीमारी के इलाज की तुलना में इनका उपयोग कम समय तक होता है, जिससे इनका व्यावसायिक आकर्षण और निवेश पर रिटर्न (Return on Investment - ROI) कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप फंड की कमी होती है, जहां R&D की लागत और लंबा समय संभावित बाजार के आकार से कहीं ज्यादा हो जाता है। निवेशक अब AMR को एक बड़ी प्रणालीगत जोखिम (systemic risk) के रूप में देखते हैं, जिसके 2050 तक $100 ट्रिलियन तक के वैश्विक आर्थिक नुकसान का अनुमान है। ऐसे में सरकारों से मजबूत कार्रवाई और नए पेमेंट मॉडल (payment models) की मांगें जोर पकड़ रही हैं। 2025 की तीसरी तिमाही में संक्रामक रोगों (infectious diseases) के लिए वेंचर फंडिंग (venture funding) में उछाल देखा गया (12 राउंड में $369 मिलियन), लेकिन यह एक शांत अवधि के बाद आया है। Pulmocide जैसी कंपनियों को भी झटके लगे हैं, जैसे कि जनवरी 2026 में ओपेलकोनाज़ोल (opelconazole) के लिए उनके Phase II ट्रायल को बंद कर दिया गया। GSK जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए विश्लेषकों की राय मिली-जुली है, एक आम सहमति 'Reduce' रेटिंग की है और -20.51% के डाउनसाइड (downside) का अनुमान है। Aurobindo Pharma को 'Hold' रेटिंग मिली हुई है, जो इसके मामूली विकास और प्रीमियम वैल्यूएशन (valuation) को दर्शाती है। लूमिंग पेटेंट एक्सपायरी (patent expirations) जैसे कारक इस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करते हैं।

सहयोग और समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का जोर है कि प्रगति में तेजी लाने के लिए व्यावहारिक तरीके मौजूद हैं। Jayasree K. Iyer, Chief Executive of the Access to Medicine Foundation, ने व्यावहारिक समाधानों की क्षमता पर प्रकाश डाला। John-Arne Røttingen, Wellcome के CEO ने कहा कि प्राइवेट कंपनियों, शोधकर्ताओं, सार्वजनिक और परोपकारी धनदाताओं और नवीन पेमेंट मॉडल (payment models) को शामिल करने वाले विविध साझेदारियों की आवश्यकता है। AMR Benchmark रिपोर्ट ने 25 कंपनियों का मूल्यांकन किया, जिनमें दवा प्रतिरोध को कम करने के लिए वास्तविक दुनिया की कार्रवाइयों की पहचान की गई। उदाहरण के लिए, Shionogi ने अपने एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial) निर्माण प्रक्रियाओं के लिए ISO 14001 सर्टिफिकेशन (certification) प्राप्त किया है, जो पर्यावरणीय मानकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आगे का रास्ता: फंडिंग और विश्लेषक की राय

आगे का रास्ता नई निवेश व्यवस्थाओं और सहयोग पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (public-private partnerships) और ऐसे पेमेंट मॉडल (payment models) की वकालत कर रहे हैं जो R&D (Research & Development) जोखिम को कम करें और समान पहुंच सुनिश्चित करें। मार्केट (market) उन कंपनियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है जो इनोवेशन (innovation) के साथ-साथ जिम्मेदार उपयोग (responsible use) और वैश्विक पहुंच (global access) के प्रति प्रतिबद्धता दिखा रही हैं। ब्रॉडर बायोफार्मास्युटिकल (biopharmaceutical) इंडस्ट्री में फंडिंग (funding) में उछाल आया है, हालांकि R&D (Research & Development) डील वॉल्यूम (deal volumes) में गिरावट आई है, जो एक अधिक चुनिंदा निवेश दृष्टिकोण का संकेत देता है। उभरती हुई बायोटेक फर्में अक्सर बड़ी फर्मों के साथ पार्टनरशिप (partnership) करती हैं, जो इनोवेशन के लिए एक हाइब्रिड मॉडल (hybrid model) का सुझाव देता है। Aurobindo Pharma के लिए विश्लेषकों की आम राय 'Buy' की है, जिसमें 1,345.19 INR का प्राइस टारगेट (price target) है, जो संभावित अपसाइड (upside) का संकेत देता है। हालांकि, एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial) विकास में प्रणालीगत चुनौतियां (systemic challenges) बनी हुई हैं।

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