Dr Reddy's Laboratories के निवेशकों के लिए एक मिली-जुली खबर आई है। कंपनी को अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से बड़ी राहत मिली है। SEC ने Dr Reddy's के खिलाफ पिछले 5 साल से चल रही जांच को फिलहाल बंद कर दिया है। 24 फरवरी, 2026 को मिली एक चिट्ठी में SEC ने कहा है कि वह इस समय कंपनी के खिलाफ कोई एनफोर्समेंट एक्शन नहीं लेने वाली है। यह जांच नवंबर 2020 में हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को कथित तौर पर गलत भुगतान करने के आरोपों को लेकर शुरू हुई थी।
SEC की राहत के मायने?
SEC के इस कदम से Dr Reddy's के शेयर में थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली। 25 फरवरी, 2026 की सुबह कंपनी का शेयर 0.6% चढ़कर ₹1,307.7 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, यह ध्यान रखना अहम है कि SEC ने साफ किया है कि यह जांच का बंद होना कंपनी को पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं करता और भविष्य में भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पहले भी, जुलाई 2021 में SEC की एक और जांच के चलते Dr Reddy's के शेयर 10% तक गिर गए थे।
Semaglutide का 'प्राइसिंग वॉर': असली टेंशन
लेकिन, रेगुलेटरी राहत के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म Citi ने Dr Reddy's पर अपनी 'Sell' रेटिंग बरकरार रखी है। इसकी सबसे बड़ी वजह है Semaglutide दवाओं के बाजार में बढ़ता कॉम्पिटिशन और Novo Nordisk की आक्रामक प्राइसिंग रणनीति। Citi का मानना है कि Novo Nordisk द्वारा अपने Ozempic और Wegovy (Semaglutide की दवाएं) की कीमतें जनवरी 2027 से घटाने का फैसला, Dr Reddy's के जेनेरिक Semaglutide प्रोडक्ट्स के लिए बड़ी चुनौती खड़ी करेगा।
जेनेरिक दवा पर कैसा होगा असर?
Citi का अनुमान है कि इस 'प्राइसिंग वॉर' के चलते Dr Reddy's को कनाडा जैसे बाजारों में FY27/28 के लिए Semaglutide से केवल $50 मिलियन (लगभग ₹400 करोड़) का ही रेवेन्यू मिल पाएगा। यह मार्केट की उम्मीदों से काफी कम है। वहीं, इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि कनाडा और ब्राजील जैसे रेगुलेटेड बाजारों में Semaglutide का कुल संभावित बाजार $500 मिलियन (लगभग ₹4,000 करोड़) तक हो सकता है, और Dr Reddy's इन बाजारों में एंट्री करने वाली शुरुआती भारतीय कंपनियों में से हो सकती है। आपको बता दें कि डायबिटीज और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली Semaglutide दवाओं का ग्लोबल मार्केट 2035 तक करीब $93.6 बिलियन (लगभग ₹7.8 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है।
वैल्यूएशन और सेक्टर का गणित
फिलहाल, Dr Reddy's का P/E रेश्यो लगभग 19-20x TTM (पिछले बारह महीनों के मुनाफे पर आधारित) चल रहा है (फरवरी 2026 तक)। यह भारतीय फार्मा सेक्टर के औसत P/E 33.9x (Nifty Pharma Index के अनुसार) से काफी कम है। 24 फरवरी, 2026 तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $11.9 बिलियन (लगभग ₹1 लाख करोड़) था। पिछले एक साल में Nifty Pharma इंडेक्स 11.0% बढ़ा है, जबकि Dr Reddy's का शेयर 15.9% चढ़ा है। हालांकि, कंपनी के कम P/E के बावजूद Citi की 'Sell' रेटिंग और बाकी एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय (कुछ 'Hold' तो कुछ 'Overweight') यह दिखाती है कि बाजार में इस स्टॉक को लेकर अलग-अलग नजरिए हैं, खासकर भविष्य के प्रोडक्ट रिस्क को लेकर।
आगे क्या?
एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Citi ने ₹1,070 का टारगेट प्राइस देते हुए 'Sell' रेटिंग दी है, जो Semaglutide मार्केट को लेकर उसकी गहरी आशंकाओं को दर्शाता है। वहीं, कुछ अन्य ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि शेयर ₹1,313.16 तक जा सकता है। बाजार की प्रतिक्रिया, SEC की खबर और एनालिस्ट्स के अलग-अलग विचारों को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में Dr Reddy's के शेयर में थोड़ी अनिश्चितता बनी रह सकती है। रेगुलेटरी राहत के बावजूद, भविष्य में दवा बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मूल्य निर्धारण की चुनौतियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।