Dr. Reddy's Laboratories के लिए पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट **69%** गिरकर **₹443 करोड़** पर आ गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह Revlimid जेनेरिक की बिक्री का खत्म होना और Semaglutide शिपमेंट में आई रुकावट है। अब कंपनी अपनी रणनीति बदलकर बायोसिमिलर (Biosimilars) और इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
क्यों गिरी Dr Reddy's की कमाई?
Dr. Reddy's Laboratories ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में 69% की गिरावट दर्ज की है। कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹443 करोड़ रह गया है, जबकि रेवेन्यू में भी 6% की कमी आई और यह ₹8,071 करोड़ रहा। यह नतीजे कंपनी के बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं, क्योंकि कंपनी अब हाई-मार्जिन वाली जेनेरिक दवाओं की बिक्री से हटकर नए और डायवर्सिफाइड बिजनेस की ओर बढ़ रही है।
Revlimid का असर
कंपनी की कमाई पर सबसे बड़ा असर Revlimid (lenalidomide) के जेनेरिक वर्जन की बिक्री की समाप्ति का हुआ है। पिछले कई सालों से यह दवा कंपनी के मुनाफे का एक बड़ा जरिया थी। 31 जनवरी 2026 को सेटलमेंट एग्रीमेंट की वॉल्यूम लिमिट्स खत्म होने के साथ ही, इस दवा से मिलने वाली एक्सक्लूसिव और हाई-मार्जिन रेवेन्यू का दौर समाप्त हो गया है। कंपनी का मैनेजमेंट भी मानता है कि ये अवसर स्थायी नहीं थे और अब मुनाफे के नए स्रोत बनाने की जरूरत है।
Semaglutide शिपमेंट में बाधा
इसके अलावा, कंपनी को एक और बड़े ऑपरेशनल झटके का सामना करना पड़ा है। वजन घटाने और डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय Semaglutide एक्टिव इंग्रेडिएंट के शिपमेंट को क्वालिटी इश्यू के कारण वॉलंटरी तौर पर रोकना पड़ा। इस वजह से कंपनी को ₹240 करोड़ का वन-टाइम प्रोविजन करना पड़ा। कंपनी ने पूरे साल के लिए सप्लाई टारगेट को घटाकर 60-70 लाख पेन कर दिया है। उम्मीद है कि अक्टूबर या नवंबर 2026 के अंत तक शिपमेंट फिर से शुरू हो जाएंगे।
बायोसिमिलर और इनोवेशन की ओर झुकाव
इन चुनौतियों से निपटने के लिए Dr. Reddy's अपनी स्ट्रेटेजी बदल रही है। अमेरिकी जेनेरिक मार्केट में इन दिनों प्राइसिंग प्रेशर काफी ज्यादा है, क्योंकि कंपटीशन बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए, कंपनी अब बायोसिमिलर, कंज्यूमर हेल्थ और इन-लाइसेंसड ड्रग प्रोडक्ट्स पर अपना फोकस बढ़ा रही है। हाल ही में कंपनी को rituximab biosimilar के वर्जन के लिए अमेरिकी FDA से अप्रूवल मिला है, जो बायो.लॉजिक्स पाइपलाइन में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आगे की राह और जोखिम
फिलहाल के ऑपरेशनल इश्यूज के अलावा, कंपनी को रेगुलेटरी कंप्लायंस और प्रतिस्पर्धी अमेरिकी जेनेरिक मार्केट में मार्जिन बनाए रखने जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। कंपनी की नई रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बायोसिमिलर और अन्य इनोवेटिव थेरेपीज में विस्तार कितना प्रभावी ढंग से करती है, और साथ ही ग्लोबल फार्मा सप्लाई चेन में चल रहे कॉस्ट प्रेशर को कैसे मैनेज करती है। शेयरधारकों के लिए आने वाले महीनों में Semaglutide शिपमेंट का सफल री-स्टार्ट और बायोसिमिलर प्रोडक्ट पाइपलाइन की ग्रोथ पर नजर रखना सबसे अहम होगा।
