Dr Reddy's Share: दवा को मिली इंडिया में मंजूरी, पर Novo Nordisk से पेंच फंसा!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Dr Reddy's Share: दवा को मिली इंडिया में मंजूरी, पर Novo Nordisk से पेंच फंसा!
Overview

Dr. Reddy's Laboratories को भारतीय दवा नियामक (CDSCO) से अपने जेनेरिक ओरल सेमाग्लूटाइड टैबलेट्स के लिए अंतिम मंजूरी मिल गई है। इस अप्रूवल के साथ ही कंपनी **₹1,600 करोड़** के वेट-लॉस और एंटी-डायबिटीज मार्केट में कदम रख रही है। हालांकि, यह मंजूरी ऐसे समय आई है जब इनोवेटर Novo Nordisk के साथ पेटेंट उल्लंघन के मुकदमे चल रहे हैं और घरेलू जेनेरिक कंपनियों के बीच प्राइस वॉर की उम्मीद है।

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Dr. Reddy's को मिली 'हरा सिग्नल', ₹1,600 Cr के मार्केट में होगी धाकड़ एंट्री

Dr. Reddy's Laboratories को इंडिया के सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से अपने जेनेरिक ओरल सेमाग्लूटाइड टैबलेट्स के लिए फाइनल अप्रूवल मिल गया है। यह अप्रूवल तेजी से बढ़ते ₹1,600 करोड़ के वेट-लॉस और एंटी-डायबिटीज ट्रीटमेंट मार्केट में कंपनी के लिए एक बड़ा कदम है। यह रेगुलेटरी क्लीयरेंस ऐसे जटिल मार्केट डायनामिक्स के बीच आई है, जिसमें पेटेंट डिस्प्यूट्स, कॉम्पिटिटर्स की आक्रामक प्राइसिंग और दूसरे रीजन्स में हालिया रेगुलेटरी चुनौतियां शामिल हैं।

क्लीनिकल डेटा, स्टॉक परफॉर्मेंस और कॉम्पिटिशन का मैदान

यह अप्रूवल 3 mg, 7 mg, और 14 mg स्ट्रेंथ वाले जेनेरिक ओरल सेमाग्लूटाइड टैबलेट्स के लिए है। क्लीनिकली, इस दवा ने Novo Nordisk के Rybelsus के मुकाबले नॉन-इन्फीरियोरिटी (non-inferiority) दिखाई है और इसे टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस के सप्लीमेंट्री ट्रीटमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। 15 अप्रैल, 2026 तक Dr. Reddy's का स्टॉक ₹1,235.00 पर बंद हुआ था, जिसमें 14.6 लाख शेयर ट्रेड हुए थे। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹1.03 लाख करोड़ और P/E रेश्यो 18.5 है। बता दें कि मार्च 2026 में Novo Nordisk के कोर सेमाग्लूटाइड पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद, भारत का GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट मार्केट तेजी से बदल रहा है। इसकी वजह से Sun Pharma, Zydus Lifesciences, Torrent Pharma, Lupin और Natco जैसी एक दर्जन से अधिक घरेलू कंपनियां अपने वर्जन लॉन्च करने या तैयारी करने में जुटी हैं। Torrent Pharma ने पहले ही 0.53 mmol वाले SNAC कंसंट्रेशन के संबंध में अपने प्रोडक्ट्स, Semalix और Sembolic के लिए एक इंटरिम एग्रीमेंट कर लिया है, जो Novo Nordisk की दावा की गई रेंज से कम है। Dr. Reddy's का लक्ष्य मार्केट का लगभग 7% हिस्सा हासिल करना है।

पेटेंट का पेंच और SNAC का खेल

Novo Nordisk का ओरल फॉर्मूलेशन पेटेंट 2031 तक वैध है। यही पेटेंट SNAC (एक एब्जॉर्प्शन एनहांसर) की कंसंट्रेशन को Dr. Reddy's और Torrent Pharma के खिलाफ चल रहे लिटिगेशन का एक अहम बिंदु बनाता है। Novo Nordisk का दावा है कि उसका स्पेसिफिक SNAC फॉर्मूलेशन 0.65-2.1 mmol की रेंज में आता है, जो कि लीगल डिस्प्यूट्स का मुख्य बिंदु है। उम्मीद है कि जेनेरिक दवाइयों के आने से ब्रांडेड वर्जन की तुलना में कीमतें 50-85% तक गिर जाएंगी, जिससे सभी प्लेयर्स के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

ब्राज़ील में झटका और एनालिस्ट्स की राय

इस मंजूरी के बावजूद, Dr. Reddy's को हाल ही में ब्राज़ील में एक रेगुलेटरी झटका लगा है, जहां ANVISA ने इसकी सेमाग्लूटाइड जेनेरिक, Embeltah, के रजिस्ट्रेशन से इंकार कर दिया था। यह रिजेक्शन एक बड़े इमर्जिंग मार्केट में कंपनी की संभावित एंट्री को प्रभावित करता है। बाजार में 40 से अधिक जेनेरिक कंपनियों के उतरने की उम्मीद है, जिससे एक तेज प्राइस वॉर शुरू हो सकती है। इस बीच, एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Citi ने रेगुलेटरी झटकों और वैल्यूएशन की चिंताओं के चलते 'Sell' रेटिंग और ₹1,070 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। वहीं, HSBC ने सेमाग्लूटाइड की मजबूत लॉन्ग-टर्म संभावनाओं और FY27-28 के लिए बेहतर अर्निंग अनुमानों के चलते Dr. Reddy's को 'Buy' रेटिंग और ₹1,445 का टारगेट प्राइस दिया है।

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